योगी सरकार ने एलान तो कर दिया कि सरकारी जमीन कब्जाने वालों पर शिकंजा कसेंगे लेकिन यह काम इतना आसान दिखता नहीं। भूमाफिया और सरकारी तंत्र के बीच गहरी साजबाज का ही नतीजा है कि रामपुर में सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन को या तो दूसरे के हाथों बेच डाला गया या फिर उस जमीन पर कोई न बिल्डिंग खड़ी कर ली। पूर्व सरकार की सख्ती के बाद भी भूमाफियाओं का नेटवर्क इतना जबर्दस्त रहा कि तमाम जमीनों के तो रिकार्ड ही गायब कर डाले गए। लिहाजा भूमाफियाओं से सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराना प्रशासन के लिए चुनौती भरा है।
यूपी की योगी सरकार एक्शन मे है। सरकार ने जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों से सख्ती से निपटने का प्लान तैयार किया है। इसके तहत हर जिले में भूमाफियाओं से जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के लिए विशेष दस्ता बनाने की घोषणा की है। कैबिनेट की मीटिंग में इसका प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। हालांकि अभी तक इस आदेश का जिला स्तर पर पालन नहीं किया गया है,लेकिन यदि इस स्कवायड को बना भी दिया जाए तो अवैध कब्जों का डाटा ही नहीं मिल पाएगा क्योंकि रामपुर की तमाम सरकारी जमीन का रिकार्ड सरकारी रिकार्ड रूम से गायब हो चुका है।
अधिकारिक सूत्रों केमुताबिक जिला मुख्यालय पर स्थित तमाम सरकारी जमीन का रिकार्ड गायब हो जाने की जानकारी है।इसका खुलासा सपा सरकार में उस वक्त हुआ जब सरकारी जमीनों को खाली कराने के लिए तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खां ने जब मुहिम शुरू कराई तो कई जमीनों का रिकार्ड प्रशासन को नहीं मिल पाया था,जिसके बाद खलबली मच गई थी। यहां पर डुंगरपुर, अजीतपुर समेत कई इलाकों की जमीनों के रिकार्ड गायब होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा था। इस तरह के करीब दर्जन भर से ज्यादा मामले सामने उस वक्त आए थे। उस वक्त प्रशासन की सख्ती के बाद तमाम जमीनों को कब्जा मुक्त भी कराया गया,जिसको लेकर खूब हंगामा भी हुआ था। रामपुर में तकरीबन सौ एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे होंगे। इस तरह का अनुमान अफसरों के पास है।