1952 से लेकर 2019 तक के चुनावी सफर पर गौर किया जाए तो रामपुर के 72 साल के चुनावी इतिहास में सबसे बड़ी जीत उन्हीं के नाम है। 1984 में जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई और फिर इसके बाद देश भर में लोकसभा चुनाव हुए तो उस वक्त कांग्रेस की सहानुभूति लहर देश में चली।
इसका फायदा रामपुर से कांग्रेस के प्रत्याशी नवाब जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां को भी मिला। मिक्की मियां ने 1984 में भाजपा के राजेंद्र शर्मा को 1.18 लाख वोटों से पराजित कर दिया था। वह 1989 में भी शानदार तरीके से जीते थे। मिक्की मियां के बाद उनकी विरासत संभालने वाली उनकी पत्नी बेगम नूरबानो ने बड़ी जीत तो दर्ज की, लेकिन वह भी मिक्की मियां का रिकार्ड नहीं तोड़ पाईं।
उन्होंने 1999 मे भाजपा के प्रत्याशी मुख्तार अब्बास नकवी को 1.15 लाख वोटों से हराकर दूसरी बड़ी जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 2019 में पहली बार सपा-बसपा के गठबंधन के टिकट पर चुनाव लड़े सपा नेता आजम खां ने भी बड़ी जीत हासिल की। लेकिन वह भी मिक्की मियां का रिकार्ड नहीं तोड़ पाए।
सबसे कम वोटों से जीत का रिकाॅर्ड नकवी के नाम पर
जहां मिक्की मियां ने सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकार्ड बनाया तो वहीं अब तक पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सबसे कम अंतर से जीत का रिकार्ड बनाया। नकवी रामपुर से दो बार चुनाव लड़े। पहले चुनाव में उन्होंने 4966 वोटों से ही जीत हासिल की थी।
उस वक्त नकवी को 265116 वोट हासिल हुए,जबकि उनकी निकटतम कांग्रेस प्रत्याशी बेगम नूरबानों को 2,60150 वोट मिले थे,लेकिन इसके बाद नूरबानों ने अपनी इस हार का बदला एक साल बाद ही हुए लोकसभा चुनाव यानि 1999 में हुए चुनाव में नकवी को रिकाॅर्ड 1.15 लाख वोटों से हारकर लिया।
कौन कितने वोटों के अंतर से जीता
चुनाव विजेता जीत का अंतर
1952 अबुल कलाम आजाद 34933
1957 रजा सैयद मेहंदी 68757
1962 रजा सैयद मेहंदी 43,695
1967 जुल्फिकार अली खां 48,899
1971 जुल्फिकार अली खां 64,340
1977 राजेंद्र शर्मा 88,078
1980 जुल्फिकार अली खां 70,408
1984 जुल्फिकार अली खां 118,957
1989 जुल्फिकार अली खां 10792
1991 राजेंद्र शर्मा 49809
1996 बेगम नूरबानो 74,747
1998 मुख्तार अब्बास नकवी 4,966
1999 बेगम नूरबानो 115,471
2004 जयाप्रदा 85,474
2009 जयाप्रदा 30 931
2014 डाॅ.नैपाल सिंह 23,435
2019 आजम खां 109,997