आजादी से पहले रामपुर रियासत के नवाबों का अपना रेलवे स्टेशन हुआ करता था। जहां हर समय दो सैलून (विशेष कोच) तैयार खड़े रहते थे। जब भी नवाब परिवार को दिल्ली, लखनऊ या कहीं और रेलमार्ग से जाना होता था तो वे अपने सैलून में सवार होते थे और सैलून ट्रेन में जोड़ दिए जाते थे।
साल 1774 से 1949 तक रामपुर में नवाबों का राज हुआ करता था। रामपुर के नौवें नवाब हामिद अली खां के दौर में जब जिले से रेलवे लाइन गुजरी तो उन्होंने रेलवे स्टेशन के करीब ही अपने लिए अलग स्टेशन बनवाया था। साथ ही मिलक तक रेलवे लाइन भी बिछवाई थी।
संपत्ति बंटवारा प्रक्रिया की प्रस्तावित विभाजन योजना में दो सैलून भी शामिल हैं। मूल्यांकन में इनकी कीमत 11 करोड़ 74 लाख 24 हजार रुपये आंकी गई थी। लेकिन रखरखाव के अभाव में खराब होने से कीमत आधी कर 5 करोड़ 87 लाख 12 हजार रुपये रह गई। जिसे सभी पक्षकारों में विभाजित किया गया है।
सैलून में प्रोजेक्टर से लेकर कैमरे तक की होती थी व्यवस्था
नवाब के सैलून में 33 एमएम सिनेमा प्रोजेक्टर, 16 एमएम सिनेमा प्रोजेक्टर, कैमरे, इंपोर्टेड रेडियो ट्रांजिस्टर, ग्रंडिंग टेप रिकॉर्डर आदि की व्यवस्था भी रहती थी। विभाजन योजना में सैलून के सामान में इनका जिक्र है। इसके अलावा कारचोबगाओ तकिया एवं मसनद, सिल्वर कैनोपी, कट ग्लास, ग्लासेज फॉरशेरी, व्हिस्की, बियर, गोल्डफिंगर बाउल्स, छुरी-कांटे, इंग्लिश क्रॉकरी एवं कटलरी, लार्ज सिल्वर सेंटर पीस, लार्ज सिगरेट एंड सिगार बॉक्स, सिल्वर पानदान, उगालदान, सिल्वर खासदान, सिल्वर कैंटीन सेट, सिल्वर हुक्का, कश्मीरी कारचोबी दोशालन, इंग्लिश गोल्ड सिगरेट केस, इंग्लिश सिल्वर सिगरेट केस, इनेमल सिगरेट बॉक्स, सिल्वर बेड्स, कैमरा, तलवार आदि सामान का जिक्र है।
निल कीमत वाले हथियार व उनकी संख्या
टूटी हुई मजेललोडिंग-सात, खराब रिवॉल्वर-10, एसबीएमएल 20 बोर गन-एक, एसबीएमएल सिर्फ बैरल-एक, एसबी रायफल 303 सिर्फ बैरल-दो, एसबीबोल्ट एक्शन रायफल-एक, एसबीएमएल गन-एक, एसबीएमएल गन 16 बोरबिना मशीन-एक, डीबीएमएल गन 12 बोर आधी-एक, डीबीएमएल 12 बोर- तीन, एमएल 16 बोर-एक, डीबीएमएल12 बोर हैमर-पांच, रायफल डीबी 500 हैमर-एक।
नवाब संपत्ति का इन्होंने किया था सर्वे व मूल्यांकन
रामपुर रियासत के अंतिम शासक की संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया में चल-अचल संपत्ति के सर्वे व मूल्यांकन के कार्य में जिला शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश सक्सेना को संपूर्ण अचल संपत्ति के मूल्यांकन के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया गया था। जिन्होंने राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, कृषि और उद्यान विभाग की मदद से संपूर्ण संपत्ति का मूल्यांकन कर रिपोर्ट तैयार की थी। जबकि चल संपत्ति का मूल्यांकन एडवोकेट कमिश्नर सौरभ सक्सेना और मुजम्मिल हुसैन द्वारा किया गया था।