सात परिजनों की हत्या की दोषी शबनम का एक फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस फोटो में शबनम हंसती हुई दिखाई दे रही है। इस फोटो के वायरल होने के साथ सवाल उठ रहा है कि रामपुर जेल में होते हुए शबनम की यह फोटो कैसे खींची गई है। नियमानुसार उससे सिर्फ वकील या रिश्तेदार ही मिल सकते हैं। जेल के भीतर कैमरा या मोबाइल फोन ले जाना पहले से प्रतिबंधित है।
इस तरह की चर्चाओं के बीच जिला कारागार के अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल हो रही फोटो रामपुर जेल की नहीं है। उनका कहना है कि हो सकता है कि पूर्व में कहीं और स्थान की फोटो हो।
बता दें कि शबनम का डेथ वारंट फिलहाल टल गया है। इसके टलने से मथुरा जेल अधिकारियों ने फिलहाल राहत की सांस ली है। जिला जज अमरोहा के डीजीसी महावीर सिंह ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट मंगलवार को जिला जज को सौंपी है। इस रिपोर्ट में उन्होंने शबनम की दूसरी दया याचिका की जानकारी जिला जज को दी है।
बताया कि है कि यह दया याचिका अभी लंबित है। डीजीसी (जिला शासकीय अधिवक्ता) ने बताया कि इस दया याचिका के लंबित रहते हुए डेथ वांरट की प्रक्रिया प्रारम्भ नहीं हो सकती। यह दया याचिका दिल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के अधिवक्ताओं ने तैयार की है।
अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के गांव बावनखेड़ी के शिक्षक शौकत अली की इकलौती बेटी शबनम पर अपने ही परिवार के सात लोगों की जघन्य हत्या करने का आरोप है। जिसे लेकर जिला जज अमरोहा ने सजा-ए-मौत का निर्णय दिया था। इसी निर्णय को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अलावा यहां तक कि राष्ट्रपति भी दया याचिका को अस्वीकार कर चुके हैं।
डेथ वारंट की प्रक्रिया जिला जज की अदालत में शुरू हो इससे पहले उसकी और से पैरवी करते हुए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के अधिवक्ताओं ने एक और दया याचिका राष्ट्रपति के नाम तैयार की है। जिसमें उन्होंने मौत की सजा पर पुन:विचार करने की प्रार्थना की है।