रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी पर छापा मारकर पुलिस ने दो हजार से अधिक किताबें जब्त कर ली हैं। पुलिस का दावा है कि ये किताबें मदरसा आलिया की हैं। इन किताबों पर मदरसा आलिया की मुहर लगी है और इनके चोरी होने की रिपोर्ट 16 जून को गंज थाने में दर्ज हुई थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस को हल्के विरोध का भी सामना करना पड़ा। पूछताछ के लिए पुलिस ने एक महिला सहित चार कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया है।
मदरसा आलिया रामपुर की प्राचीन शिक्षण संस्थाओं में शामिल है। रिसायत काल का यह पहला कालेज था। इसकी सनद जामिया अजहर, मिस्र में मान्य थी। इस मदरसे से कई नामचीन शख्सियतों ने तालीम हासिल की थी। वक्त गुजरने के साथ-साथ मदरसा आलिया महत्व खोता गया। राजनाथ सिंह जब प्रदेेश के मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने इसकी ओर ध्यान दिया था और इसके सुधार के लिए ग्रांट भी जारी की गई थी। मदरसा आलिया बचाओ संघर्ष समिति, तंजीम अवामे अहले सुन्नत और पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां ने बार-बार यह आरोप लगाए थे कि सपा शासनकाल में मदरसा आलिया की लाइब्रेरी की बहुमूल्य पुस्तकों को खुर्दबुर्द कर दिया गया है। आरोप था कि किताबें चोरी कर ली गई हैं। मदरसा आलिया के प्रिंसिपल जुनैद खां ने इसको लेकर पुलिस को तहरीर दी थी। उनकी तहरीर के आधार पर 16 जून को गंज थाने में अज्ञात के खिलाफ चोरी की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही थी।
मंगलवार को पुलिस अधीक्षक डॉ. अजय पाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल जौहर यूनिवर्सिटी पहुंच गई और लाइब्रेरी पर छापा मारा। पुलिस की इस कार्रवाई का हल्का विरोध भी हुआ। कई महिलाओं ने पुलिस की र्कावाई को गलत बताया। लगभग दस घंटे तक चली कार्रवाई में पुलिस ने लगभग दो हजार किताबें और कुछ फर्नीचर बरामद की है। पुलिस ने सभी किताबों को चालीस बंडलों में सील कर दिया है। इन बंडलों को पुलिस थाने ले आई है। पुलिस का कहना है ये वही किताबें हैं जो मदरसा आलिया से चोरी हुईं थीं। पुलिस ने छापेमारी के दौराबन चार लोगों को भी हिरासत में लिया है। इन लोगों से पूछताछ की जा रही हैा पुलिस का कहना है कि अभी जांच जारी है। जांच के बाद अज्ञात में दर्ज मुकदमे में आरोपियों के नाम शामिल किए जा सकते हैं।