रामपुर। किसानों की समस्याओं को लेकर कलक्ट्रेट के अधिकारी कितने गंभीर हैं, इसकी बानगी सोमवार को देखने को मिली। यहां कई गांवों के किसान अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे, लेकिन किसी अधिकारी ने उनसे मिलना मुनासिब नहीं समझा। साढ़े तीन घंटे तक किसान बैठे रहे। इसके बाद ज्ञापन जलाकर घर चले गए।
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान सोमवार को पराली की समस्या को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात करने और उनको ज्ञापन सौंपने के लिए कलक्ट्रेट पहुंचे थे। किसान कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी के कार्यालय के बाहर लगभग साढ़े तीन घंटे तक बैठकर अधिकारियों का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई भी अधिकारी उनसे ज्ञापन लेने और उनकी बात सुनने नहीं आया। इससे नाराज किसानों ने दोपहर लगभग डेढ़ बजे कलेक्ट्रेट में ही अपने ज्ञापन को जला दिया। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं किया तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।
किसान नेता तेजिंदर सिंह विर्क ने बताया कि जिलाधिकारी का आदेश है कि धान की कटाई के बाद पराली को जलाया नहीं जाना है। किसान इस मुद्दे को लेकर जिलाधिकारी से मिलने और ज्ञापन देने पहुंचे थे। उनका कहना है कि इस साल समय पर बारिश नहीं होने से किसानों का खर्च दोगुना हो गया है। इस स्थिति में पराली जलाने पर रोक से किसानों को पांच हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। सरकार अगर पराली जलाने पर रोक लगाना चाहती है तो किसान भी सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से किसानों को अनुदान दिया जाए। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि एक अक्तूबर से शुरू होने वाली धान की खरीद में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। धान क्रय केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। प्रति वर्ष क्रय केंद्रों पर दलाल सक्रिय हो जाते हैं और किसानों से धान की खरीद एमएसपी से कम पर करके उसे कागजों में किसान के नाम पर चढ़ा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि किसान लगभग साढ़े तीन घंटे तक कलक्ट्रेट में बैठे रहे, लेकिन हमारी बात सुनने कोई नहीं आया। हमसे ज्ञापन भी नहीं लिया गया। इस मौके पर गुरचरन सिंह सिद्धू, बलविंदर सिंह मल्ली, बलजीत सिंह बिट्टू, सलीम वारसी, मलकीत सिंह, जसवंत सिंह, फरहत अली, अर्पित तिवारी, रईस अहमद, भानू गंगवार, बलदेव सिंह, गुरप्रकाश सिंह, करनैल सिंह और पलविंदर सिंह, अवतार सिंह और योगेश सिंह सहित अन्य कई किसान मौजूद मौजूद रहे।