नई जेल के लिए स्थानांतरित जमीन की जांच होगी
शुरुआती जांच में सामने आया कि जमीन जेरे इंतजामिया कलक्टर श्रेणी की है
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर। नई जेल के निर्माण के लिए कारागार विभाग को चीन मिल की जो जमीन स्थानांतरित की गई थी उसकी भी जांच कराई जाएगी। क्योंकि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह जमीन जेरे इंतजामिया कलक्टर है। यानि इस जमीन के मालिक जिलाधिकारी हैं। इस बारे में चीनी मिल से स्टेट्स रिपोर्ट मांगी गई है। पूछा गया कि किस आधार पर चीनी मिल ने इस जमीन को कारागार विभाग को स्थानांतरित किया था।
समाजवादी पार्टी की सरकार में शहर में नई जेल के निर्माण को मंजूरी मिली थी। तब इसके निर्माण के लिए बीस करोड़ रुपये भी जारी कर दिए गए थे। उसके बाद जेल के लिए जमीन की तलाश शुरू की गई। अफसरों ने सिविल लाइंस स्थित चीनी मिल की जमीन का चयन किया, जिसके बाद कारागार विभाग ने चीनी निगम से जमीन खरीद ली थी। यह जमीन करीब 66 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी। कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज ने फरवरी 2015 में चीनी मिल का निर्माण शुरू करा दिया। करीब दस माह तक यह काम चला। बीस करोड़ रुपये भी खर्च कर दिए गए। लेकिन, सूबे में भाजपा की सरकार आते ही लोगों की मांग पर जेल का निर्माण रोक दिया गया। अब यहां मॉडल टाऊनशिप बनाने की योजना प्रस्तावित है, जिसकी शासन से अनुमति मांगी गई है।
इस बीच चीनी मिल की यह जमीन ही विवादों के घेरे में आ गई है। दरअसल, इससे जुड़े दस्तावेज देखने के बाद अफसरों को पता चला कि यह जमीन कारागार विभाग को गलत तरीके स्थानांतरित की गई है। चीनी मिल के पास इसका मालिकाना हक नहीं है। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन जेर इंतजामिया कलक्टर की श्रेणी में है। जिलाधिकारी के सामने यह मामले आते ही उन्होंने अब विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारं भिक जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि जितनी जमीन खतौनी में है उतनी जमीन मौके पर नहीं है। इस बात की जांच कराई जाएगी की बाकी जमीन कहां गई।
कोट
चीनी मिल की जो जगह कारागार विभाग को स्थानांतरित की गई है वह जेरे इंतजामिया कलेक्टर श्रेणी की है। अब इसकी जांच कराई जा रही है कि वास्तविकता क्या है? किन परिस्थितियों में और किसके आदेश पर जमीन कारागार विभाग को स्थानांतरित की गई। जांच रिपोर्ट से शासन को अवगत कराया जाएगा। आंजनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी