रामपुर। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 30 आवश्यक दवा फॉर्मूलेशन की खुदरा कीमतें निर्धारित कर दी हैं, जिससे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इस निर्णय से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, एलर्जी और विटामिन-डी व कैल्शियम की कमी से जूझ रहे मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।
जिले में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जिन्हें रोजाना दवाएं लेनी पड़ती हैं। लंबे इलाज में दवाओं पर होने वाला खर्च मरीजों और परिवारों के लिए चिंता का विषय बना रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आवश्यक दवाओं की कीमतें तय होने से मरीजों को निर्धारित दरों पर दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी और अनावश्यक मूल्यवृद्धि पर अंकुश लगेगा।
एनपीपीए ने मधुमेह की दवाओं के अलावा कैल्शियम सप्लीमेंट, एलर्जी और संक्रमण संबंधी कई दवाओं को भी मूल्य नियंत्रण के दायरे में शामिल किया है।
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कीमतें निर्धारित होने से मरीजों को लाभ मिलेगा और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। नियमित दवाएं लेने वाले मरीजों को राहत मिलेगी। मूल्य नियंत्रण से अनावश्यक मूल्य वृद्धि पर रोक लगेगी और लोगों को आवश्यक दवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। -दीपक शर्मा, जिलाध्यक्ष फार्मा ट्रेडर्स एसोसिएशन
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डायबिटीज और बीपी के मरीजों को हर महीने दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। दाम कम होने से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। कई मरीज आर्थिक परेशानी के कारण दवाएं नियमित नहीं ले पाते थे। अब इलाज जारी रखना आसान होगा। -मो. आजम, दवा विक्रेता
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आवश्यक दवाओं की कीमत नियंत्रित होने से मरीजों का खर्च घटेगा। खासकर बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को फायदा मिलेगा। यह फैसला आम लोगों के हित में है और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाएगा। -अमित अरोरा, दवा विक्रेता
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मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के मरीज लंबे समय तक दवाओं पर निर्भर रहते हैं। कीमतों में कमी आने से उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी और वे नियमित रूप से दवाओं का सेवन कर सकेंगे। -रवि गुप्ता, दवा विक्रेता