रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का नोटिस वापस लेने की मांग पर समाजवादी महिला सभा की प्रदेश सचिव नीलम सिंह यादव रविवार को गांधी समाधि पर आमरण अनशन करने जा पहुंचीं। प्रयागराज से आईं नीलम सिंह को पुलिस ने अनशन शुरू नहीं करने दिया। उन्हें निषेधाज्ञा उल्लंघन के आरोप में कोतवाली ले आई। वहां जमानती मुचलके पर रिहा करने के बाद महिला पुलिस की देखरेख में जिले की सीमा से बाहर पहुंचा दिया। पुलिस ने उन समेत पांच नामजद और कुछ अज्ञात पर रिपोर्ट भी दर्ज की है।
इस बीच नीलम सिंह यादव ने आरोप लगाया कि वह जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का नोटिस वापस लेने की मांग के साथ शांतिपूर्ण ढंग से गांधी समाधि पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करने आई थीं लेकिन प्रशासन ने उन्हें धरना तक नहीं देने दिया। उनका कहना था कि इस मामले से जौहर यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हजारों छात्रों के भविष्य का सवाल जुड़ा है।
पुलिस ने बताया कि उनके विरुद्ध निषेधाज्ञा का उलंघन करने और बिना अनुमति के गांधी पार्क में धरना देने की कोशिश करके आवाजाही प्रभावित करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई है। रिपोर्ट में उनके साथ मौजूद रहे संदीप मौर्य, आरिफ, आरिफ खान ,शाने आलम के नाम और कुछ अज्ञात का हवाला भी शामिल है। पुलिस ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी को जारी आरडीए के नोटिस के विरोध में बिना अनुमति लिए अनशन की कोशिश के चलते हस्तक्षेप कर धरना शुरू होने से पहले ही वैधानिक कार्रवाई कर दी गई।
दूसरी ओर, सपा नेता एवं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सतनाम सिंह मट्टू ने बताया कि गांधी समाधि पर पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी के बीच नीलम सिंह यादव को धरना शुरू नहीं करने दिया गया। बाद में उन्हें थाने ले जाकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की गई और पुलिस सुरक्षा में जिले की सीमा से बाहर भेज दिया गया।
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बिना अनुमति गांधी समाधि स्थल पर आमरण अनशन शुरू करने का प्रयास किया गया था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और वैधानिक कार्रवाई की। नीलम सिंह यादव समेत पांच नामजद और कुछ अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। - अनुराग सिंह, एएसपी, रामपुर
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ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ जौहर यूनिवर्सिटी की चुनौती याचिका पर सुनवाई आज
रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ प्रबंधन और जौहर ट्रस्ट की ओर से कमिश्नर एवं रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के अध्यक्ष के कोर्ट में दाखिल चुनौती याचिका पर सोमवार को सुनवाई निर्धारित है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन, छात्र-छात्राओं समेत तमाम राजनीतिज्ञों की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं।
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को बिना नक्शा स्वीकृति के अवैध निर्माण मानते हुए आरडीए के उपाध्यक्ष एवं जिलाधिकारी ने 15 जुलाई को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। आरडीए के इस आदेश को यूनिवर्सिटी प्रबंधन और जौहर ट्रस्ट ने आरडीए अध्यक्ष एवं कमिश्नर की कोर्ट में चुनौती दी है। यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता मोहम्मद जुनैद एजाज ने बताया कि सोमवार को याचिका के अंगीकरण पर सुनवाई होनी है। तय होगा कि चुनौती याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। संवाद