शाहबाद। सैफनी में प्रसव के दौरान नवजात की मौत के मामले में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। जब प्रशासनिक टीम पोस्टमार्टम के लिए नवजात का शव कब्र से निकालने पहुंची, तो परिजनों ने शव बाहर निकलवाने से साफ इनकार कर दिया।
करीब एक माह पूर्व शाहबाद के मोहल्ला कानूनगोयान निवासी इकरार बेग के पुत्र सलमान की आठ माह की गर्भवती पत्नी उमरा को प्रसव पीड़ा होने पर सैफनी स्थित चांद हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि वहां मौजूद झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही के चलते समय से पहले डिलीवरी कराई गई, जिससे नवजात की मौके पर ही मौत हो गई थी। जच्चा की स्थिति गंभीर होने पर उसे मुरादाबाद के निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया था। इस मामले में पीड़ित परिवार ने सैफनी थाने में झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ तहरीर दी थी, जिसके आधार पर थाना प्रभारी हमवीर सिंह ने मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान मेडिकल साक्ष्य के लिए नवजात के शव का पोस्टमार्टम आवश्यक माना गया, जिसके लिए डीएम की अनुमति प्राप्त होने के बाद मंगलवार शाम को सीओ हर्षिता सिंह एवं एसडीएम हिमांशु उपाध्याय की उपस्थिति में कब्र से शव निकालने की प्रक्रिया की तैयारी की गई। हालांकि, जब अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव निकालने की बात कही गई, तो परिजनों ने इसका विरोध करते हुए शव बाहर निकलवाने से इनकार कर दिया। सीओ हर्षिता सिंह ने बताया कि परिजनों की असहमति के कारण टीम को बिना पोस्टमार्टम किए लौटना पड़ा। अब पुलिस और प्रशासन के समक्ष चुनौती है कि जांच को आगे कैसे बढ़ाया जाए, क्योंकि मेडिकल साक्ष्य के अभाव में विवेचना प्रभावित हो सकती है।