फार्म-35 पर निरीक्षण, फुटकर दवा विक्रेताओं को फार्मासिस्ट की बाध्यता, टैक्स से लेकर बिल व कैश मेमो को लेकर उत्पीड़न समेत तमाम समस्याओं के निस्तारण को दवा विक्रेताओं ने रणनीति तैयार की। साथ ही शासन से सुनवाई न होने की स्थिति में कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का भी निर्णय लिया गया। कई मामलों में कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर भी चर्चा की गई।
रामपुर केमिस्ट एसोसिएशन से जुड़े दवा विक्रेताओं की मीटिंग सिविल लाइंस स्थित एक होटल में हुई। मीटिंग में वाराणसी से आए केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सेक्रेटरी रमेश चंद्र माहेश्वरी और गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजदेव त्यागी ने भी शिरकत की। स्थानीय दवा विक्रेताओं ने दोनों अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद रमेश चंद्र माहेश्वरी ने पहले दवा विक्रेताओं से उनकी समस्याएं जानीं। कहा कि कई समस्याएं केवल दवा विक्रेता की जानकारी के अभाव और जागरूकता की कमी के कारण हैं।
मसलन, दवा विक्रेता को कैश मेमो या बिल मेंटेन कर दिखाने के लिए बाध्यता खत्म हो गई। इसके स्थान पर दवा विक्रेता सेल इनवाइस कैश को प्रयोग करे लेकिन, इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वैट को नहीं अब जीएसटी को समझकर दवा विक्रेता को आगे बढ़ना है। नूर मोहम्मद, राजू भैया, अमति बंसल, रमेश श्रीवास्तव, आसिम खां, फरीद अहमद, विनीत शर्मा, अंजनि कुमार मौर्य, आशीष ब्रह्म भट्ट, पुरुषोत्तम मिश्रा, राजेंद्र गुप्ता, कन्हैया लाल, देवेंद्र पंवार मौजूद रहे।