भोट (रामपुर)। धान, गेहूं और गन्ने की खेती करने वाले जिले के किसानों का रुझान मटर की खेती ओर तेजी से बढ़ा है। रामपुर का एक छोटा सा कस्बा थूनापुर मटर मंडी के रूप में जाना जाने लगा है। यहां से मटर की आपूर्ति दिल्ली की आजादपुर मंडी को की जाती है। इसके अलावा मटर को संरक्षित कर इसे पैकेट बंद करके बेचने वाली कंपनियां भी यहां से खरीदारी करती हैं।
जिले के किसान सबसे ज्यादा धान एवं गेहूं की खेती करते रहे हैं। इन फसलों में पैदावार तो खूब होती है, लेकिन किसानों को इनकी संतोषजनक कीमत नहीं मिल पाती है। हालांकि, यहां दूसरी फसलें जैसे दलहन एवं तिलहन की खेती भी होती है, लेकिन इसका रकबा बहुत कम होता है। अब जिले के किसान बड़े पैमाने पर मटर की खेती कर रहे हैं। बीते एक दशक से मटर की खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ा है। किसानों की मानें तो मटर की खेती करने के पीछे कई कारण हैं। एक तो यह कम समय के लिए होती है और दूसरा अब रामपुर की मटर की मांग दूसरे राज्यों से भी आ रही है। इसके अलावा मटर की खेती के बाद तुरंत मेंथे की खेती की जा सकती है। मांग बढ़ने और मुनाफा अधिक होने की वजह से किसानों का आकर्षण भी मटर की खेती की तरफ है। मटर व्यापारी मोहम्मद अनवर बताते हैं कि दूसरे प्रदेशों की तमाम बड़ी बड़ी फैक्टरियां रामपुर से मटर खरीदती हैं , जिसे स्टोर करने के बाद कंपनियां महंगे दामों पर बेचती हैं। वर्तमान में रामपुर में करीब चार हजार हेक्टेयर रकबे में मटर की खेती हो रही है। इस बार किसानों को मटर का रेट भी अच्छा मिल रहा है। मटर का रेट करीब 17-18 सौ रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।