उत्तराखंड के रामनगर बैराज से रविवार को दिन में छोड़े गए 30 हजार क्यूसेक पानी से कोसी नदी फिर से उफना गई। नदी का तेज बहाव पसियापुरा गांव में बने लकड़ी के अस्थाई पुल को बहा ले गया। गांव पानी की जद में आ गया है। गांव का संपर्क भी कट गया।ग्रामीण नावों के जरिये आवागमन को मजबूर हैं। वहीं कोसी नदी के पानी से खेत और फसल जलमग्न हो गई हैं। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचनी शुरू हो गई हैं।
शनिवार को पहाड़ी और मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश के बाद उत्तराखंड के रामनगर बैराज से रविवार को छोडे़ गए 30 हजार क्यूसेक पानी से फिर से कोसी नदी का जलस्तर बढ़ गया। जिससे नदी के आसपास के खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए। वहीं नदी की तेज धार पसियापुरा के ग्रामीणों द्वारा कुछ दिन पूर्व आवागमन के लिये तैयार किए गए लकड़ी के अस्थाई पुल को फिर से बहा ले गई। जिससे ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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ग्रामीणों ने आवागमन करने के लिये प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई नाव का सहारा लिया। इधर, कोसी नदी में आये पानी से किसानों की कई हेक्टेयर फसल जलमग्न हो गई। नदी में बढ़ रहे लगातार पानी से पसियापुरा के ग्रामीणों में हड़कंप मचा है। वहीं प्रशासन द्वारा कोई सुध न लेने से पसियापुरा के ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है। इधर, उप जिलाधिकारी अभय गुप्ता ने बताया कि रविवार को कोसी नदी में 30 हजार क्यूसेक पानी रामनगर बैराज से छोड़ा गया। जिससे नदी का जलस्तर बढ़गया है।
पसियापुरा गांव में ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थाई पुल बह जाने के नाव का संचालन किया जा रहा है। बिजली की सप्लाई जलस्तर कम होने के बाद जुड़वा दी जाएगी। हादसे के अंदेशे के चलते बिजली बंद करा दी गई है।