कल्याणकारी पर्यूषण महोत्सव के नवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म के महत्व को समझाया गया। श्री पार्श्वनाथ और आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सर्वहित के भाव को जागृत करने के लिए प्रेरित किया गया। जो है वो मेरा नहीं, बल्कि सबका है, इस भाव के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया।
फूटा महल स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में नवें दिन श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की। रात में सामूहिक आरती, लकी ड्रॉ, शास्त्र प्रवचन आदि का आयोजन किया गया। सुनीता जैन शास्त्री और पदमा दीदी ने उत्तम आकिंचन धर्म के बारे में बताया। कहा कि जो है वह सबका है।
इस भाव से जीवन जीने वाले तनाव मुक्त रहते हैं। परिग्रह और आकिंचन धर्म का पालन मुश्किल जरूर है, लेकिन इससे ही मोक्ष और तनाव मुक्त जीवन की राह प्रशस्त होती है। संचालन जोड़ी समीज और शीनू जैन रहे। पुरस्कार वितरण वैद्य बांके लाल जैन संस्थान की ओर से किया गया।
इस दौरान अध्यक्ष अशोक कुमार जैन, विशाल जैन, विमल चंद्र जैन, सरोज जैन, अनुराग जैन, देवेंद्र कुमार जैन, आशीष जैन, नितिन जैन, प्रमोद कुमार जैन, रमेश जैन, भारत भूषण जैन, शिखर चंद जैन, नरेंद्र कुमार जैन, पंडित होतीलाल जैन, अंजू जैन, चंद्र प्रभा जैन, नीता जैन, लीना जैन, शशि जैन, नीतू जैन, वंशिका, दीक्षा जैन आदि मौजूद रहे।
वहीं, सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भी उत्तम आकिंचन धर्म के बारे में बताया गया। मथुरा चौरासी से आए पंडित शशांक शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि सभी के हित के बारे में सोचना ही मानव जीवन का उद्देश्य है। तेरे-मेरे से ऊपर उठकर जो है, सभी का है।
इस भाव को हृदय में उतारने वाला मनुष्य ही जीवन में तनाव से दूर रहकर मोक्ष की प्राप्ति करता है। इस दौरान संजय जैन, डा. शीलू जैन, कृति, रमा, पूनम, शशि, सरोज, दिनेश जैन, वंदना, मोनिका, हरीश, सर्वेश, रमेश सेठी, जुगल किशोर, सुनील जैन, विजय दिवाकर, धमेंद्र सेठी आदि मौजूद रहे।