कल्याणकारी पर्यूषण महोत्सव के सातवें दिन उत्तम तप धर्म को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। समझाया गया कि किस प्रकार बुराइयों और पाप का नाश कर आत्मा को तप धर्म का पालन कर कुंदन बनाया जा सकता है। महोत्सव में प्रात: काल प्रक्षाल पूजन और शाम को सामूहिक आरती हुई।
फूटा महल स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सातवें दिन शांतिधारा संजय जैन ने की। दशलक्षण और अन्य पूजा कर तत्वार्थ सूत्र वाचन सुनीता जैन शास्त्री ने किया। सामूहिक आरती, लकी ड्रॉ, शास्त्र प्रवचन, अतीत का स्मरण पर आधारित प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सुनीता जैन शास्त्री और पदमा दीदी ने उत्तम तप धर्म के बारे में बताया।
कहा कि कर्म शत्रुओं का नाश करना तप कहलाता है। कर्मों को शांति पूर्वक भोगना और जीव हिंसा न करना ही तप है। संचालन जोड़ी नितेश जैन और प्रीति जैन रहे। अशोक कुमार जैन, विशाल जैन, अनुराग जैन, देवेंद्र कुमार जैन, आशीष जैन, नितिन जैन, प्रमोद कुमार जैन, अक्षय जैन, श्रेयांश जैन, रमेश जैन, भारत भूषण जैन, शिखर चंद रहे।
वहीं, सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भगवान श्री आदिनाथ का पूजन किया गया। शाम को आरती के साथ ही मथुरा चौरासी से आए पंडित शशांक शास्त्री ने कहा कि तप कर ही आत्मा को कुंदन किया जा सकता है। तप धर्म के अनुपालन से ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में अंकों का खेल का आयोजन मिथिलेश जैन की अध्यक्षता में किया गया। संचालन डा. शीनू जैन ने किया। इस दौरान संजय जैन, डा. शीनू जैन, कृति, रमा, पूनम, शशि, सरोज, दिनेश जैन, वंदना, मोनिका, हरीश, सर्वेश, रमेश सेठी, जुगल किशोर, सुनील जैन, विजय दिवाकर, धमेंद्र सेठी, आदि मौजूद रहे।