एक जुलाई से खुलेंगे स्कूल, जिले के 40 स्कूली वाहन अब भी अनफिट
संभागीय परिवहन विभाग का दावा, बिना फिटनेस वाले वाहनों पर की जाएगी कार्रवाई
रामपुर। जिले में दो दिन बाद यानी एक जुलाई से निजी और सीबीएसई स्कूल और खुल जाएंगे, लेकिन अभी तक जिले में 280 स्कूली वाहनों में से 40 वाहनों ने फिटनेस नहीं कराई है। ऐसे में दो दिन बाद स्कूल खुल जाने पर इन वाहनों से ही विद्यार्थियों को स्कूल लाने और ले जाने का काम किया जाएगा। हालांकि संभागीय परिवहन विभाग ने दावा किया है कि स्कूल खुलने के बाद अभियान चलाकर वाहनों की चेकिंग की जाएगी और अनफिट वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संभागीय परिवहन विभाग के अनुसार जनपद में 280 स्कूल वाहनों का पंजीकरण है। हालांकि यह संख्या अधिक हो सकती है, क्योंकि कुछ वाहन संभागीय परिवहन विभाग में तो पंजीकृत हैं, मगर उनका उल्लेख स्कूल ट्रांसपोर्ट में नहीं किया गया है। इसके बावजूद वे बच्चों को लाने व ले जाने में लगे हैं। कोरोना संक्रमण के चलते बीते दो वर्षों से स्कूलों में लगी अधिकतर बसें खड़ी हुई थीं। कोरोना संक्रमण के दौरान जहां स्कूल-कॉलेज बंद रहे। अब खुलने पर अधिकतर अभिभावक बच्चों को खुद ही स्कूल छोड़ना पसंद किया। लेकिन, कोरोना संक्रमण का असर कम होने के बाद स्कूलों को दोबारा खोला गया। इस दौरान स्कूलों में बसों का संचालन भी शुरू हुआ। इसके बाद भी वाहनों को बिना फिटनेस के बच्चों को ले जाया जा रहा है। संभागीय परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अभी भी 40 स्कूली वाहनों ने फिटनेस संबंधी प्रमाण पत्र नहीं लिया है।
मई माह में स्कूली बस पलटने से हो गई थी एक छात्रा की मौत
रामपुर। दो दिन बाद स्कूल खुलने पर संभागीय परिवहन विभाग वाहनों की फिटनेस और उनके द्वारा मानकों को पूरा किया जाने को लेकर कितना गंभीर रहेगा ये बात देखनी होगी। पिछले माह मई में 17 तारीख को मिलकखानम थाना क्षेत्र के पिपलिया जट गांव के पास एक कच्चे रास्ते पर डिवाइन इंटरनेशनल स्कूल की बस पलट गई थी। हादसे में एक यूकेजी की छात्रा अनुप्रीत कौर की मौत हो गई थी। इसके हादसे के बाद हरकत में आए संभागीय परिवहन विभाग ने मानकों की अनदेखी पर 41 स्कूली वाहनों के पंजीकरण को निलंबित कर दिया था।
स्कूल बसों के संचालन के संबंध में कुछ प्रमुख मानक :-
- सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल बस पीले रंग से पेंट होनी चाहिए।
- बस के आगे पीछे स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- सभी खिड़कियों के बाहर लोहे की ग्रिल होनी चाहिए।
- अग्निशमन यंत्र लगा होना चाहिए।
- स्कूल का नाम और फोन नंबर होना चाहिए।
- दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
- चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए।
- ट्रांसपोर्ट परमिट होना चाहिए।
- स्कूली बसों को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। स्कूल में बस चलाने के सभी नियमों और मानकों को पूरा करने पर ही बस को चलने दिया जाएगा। नियम तोड़ने वाली बसों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी स्कूलों और बस संचालकों को इसके बारे में अवगत कराया गया है।
- राजेश कुमार श्रीवास्तव, एआरटीओ