सरकार बदलते ही अफसरों के सुर बदलने शुरू हो गए हैं। सपा शासन में सिटी डिस्पेंसरी को पालिका को दे दिया गया था,लेकिन पालिका ने यहां पर बी अम्मा मार्केट बना ली। अब जब सरकार बदली तो स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सिटी डिस्पेंसरी को वापस मांग लिया है। इसको लेकर सेहत विभाग के मुखिया ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को एक पत्र लिखकर सिटी डिस्पेंसरी वापस मांगी है। इस पत्र के आने के बाद पालिका प्रशासन में भी खलबली मच गई है।
शहर के बीचो बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिटी डिस्पेंसरी का संचालन किया जाता था। हालांकि सिटी डिस्पेंसरी सेहत विभाग की देखभाल के अभाव में काफी जर्जर हो चुकी थी और यहां शहरी क्षेत्र के मरीजों को न तो दवा मिल पाती थी और न ही लोगों का इलाज भी ढंग से हो पाता था,लेकिन वर्ष 2012 तक सिटी डिस्पेंसरी शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए लाभकारी साबित रही। सपा सरकार आने के बाद नगर पालिका ने शहर की सिटी डिस्पेंसरी को सेहत विभाग से ले लिया। सेहत विभाग की ओर से इसको लेकर एक शर्त भी रखी गई थी कि यदि सिटी डिस्पेंसरी के स्थान पर कुछ भी बनता है तो उस भवन में सिटी डिस्पेंसरी के लिए भी स्थान आवंटित किया जाए।
इस शर्त के साथ सिटी डिस्पेंसरी को सेहत विभाग ने नगर पालिका के सुपुर्द कर दिया। वर्ष 2013 में सिटी डिस्पेंसरी के स्थान पर शापिंग कांप्लेक्स का निर्माण कराने की मंजूरी दे दी गई। वर्ष 2013 में पालिका ने सिटी डिस्पेंसरी के स्थान पर शापिंग कांप्लेक्स बना दिया गया। शापिंग कांप्लेक्स पर 1.64 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दे दी गई। नगर पालिका ने सिटी डिसस्पेंसरी के स्थान पर बी अम्मा मार्केट तो बनवा ली,लेकिन सेहत विभाग सिटी डिस्पेंसरी से हाथ धो बैठा। अब सरकार जाने के बाद उसी स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सिटी डिस्पेंसरी को वापस मांग लिया है जिसको किसी जमाने में सेहत विभाग ने मुफ्त में देकर सपा सरकार की वाहवाही लूटी थी। मुख्य चिकित्साधिकारी डा.शंकर लाल सारस्वत ने इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखकर सिटी डिस्पेंसरी वापस मांगी है। कहा कि सिटी डिस्पेंसरी को वापस दे दी जाए,ताकि यहां पर फिर से सिटी डिस्पेंसरी चालू किया जाए। इस कार्रवाई से खलबली मच गई है।