हजार-पांच सौ के नोटों की बंदी से दढ़ियाल के मशहूर गुड़ की मिठास फीकी कर दी है। तैयार गुड़ कोल्हुओं में डंप पड़ा है। नोटों की किल्लत के चलते खरीददार नहीं मिल रहे हैं। अधिकांश कोल्हू स्वामी पुराने नोटों में ही सस्ता गुड़ बेचने को मजबूर हैं। नहीं तो उनका गुड़ स्टाक में पड़ा डंप हो रहा है। कोल्हुओं के बंद होने की नौबत आ गई है। वहीं कोल्हूओं में काम कर रहे सैकड़ों लोग बेरोजगार होने की कगार पर हैं।
दढ़ियाल कस्बे में हर वर्ष लगभग 30 करोड़ रुपये का गुड कारोबार होता है। वर्तमान में कस्बे में 50 से अधिक कोल्हू चल रहे हैं। जिनमें हर रोज 65 से 70 टन गुड़ तैयार किया जा रहा है। कोल्हुओं में प्रतिदिन पांच हजार क्विंटल से अधिक गन्ने की पेराई की जा रही है। प्रत्येक कोल्हू में 10 से अधिक मजदूर काम कर परिवार चलाते हैं। कस्बे के सैकड़ों लोग गुड़ तैयार होने से लेकर मंडी पहुंचाने तक कहीं न कहीं रोजगार से जुड़े हैं। लेकिन पिछले दिनों नोट बंदी के चलते कोल्हू स्वामियों को भारी दिक्क्त हो रही है।
मंडी में नोटों की किल्लत के चलते उन्हें गुड़ बेचने में परेशानी आ रही है। आढ़ती पुराने नोटों के बदले गुड़ खरीद रहे हैं। जबकि कोल्हू स्वामियों से गन्ना खरीदने के लिए किसान नए नोटों की मांग कर रहे हैं। मजबूरन तैयार गुड़ कोल्हृुओं में पड़ा है। कुछ किसानों को भी गन्ने के बदले पुराने नोट दिए जा रहे हैं, जिससे कोल्हू मालिक और किसान दोनों बैंकों में धक्के खाने को मजबूर हैं। कोल्हू स्वामी नजाकत, नजी अहमद, अख्तर अली, राजेंद्र सिंह, सतपाल सिहं का कहना है कि यदि कुछ दिन स्थिति यही रही तो कोल्हू बंद करने की नौबत आ जाएगी।