रामपुर की राजनीति के हिसाब से अब तक डीएम को सपा का करीबी माना जाता रहा है। डीएम अमित किशोर आजम खां के चहेते अधिकारी माने जाते हैं। रामपुर में ही सीडीओ थे। कहा जाता है कि कैबिनेट मंत्री आजम खां के इशारे पर बतौर डीएम उनकी रामपुर में तैनाती की गई। लेकिन अब रातों रात सपा भी डीएम के विरोध पर उतर आई है। हफ्ते भर पहले बसपा और कांग्रेस ने डीएम अमित किशोर और पुलिस अधिकारियों की शिकायत की थी। इन्हें आजम समर्थक बताकर चुनाव आयोग से हटाने की मांग की थी।
आजम समर्थकों की रैली रोककर डीएम ने फिजा में नए सवाल तैराए हैं। जिस अफसर को आजम खां का घोर समर्थक माना जा रहा था उसने आजम समर्थकों की रैली क्यों रोकी इसके भी मतलब निकाले जा रहे हैं। बसपा और कांग्रेस का कहना है कि ये विरोध दिखावटी है। सपा चाहती है कि डीएम रामपुर में ही बने रहें।
इससे पूर्व मामला तब चर्चा में आया जब नगर विकास मंत्री आजम खां के समर्थन में बाइक रैली निकाल रहे सपाइयों को पुलिस और प्रशासन ने आगे नहीं बढ़ने दिया। रैली पर रोक लगाने के विरोध में सपाई भड़क गए।
उन्होंने जिलाधिकारी से पुलिस और अधिकारियों को शिकायत की। आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन शहर का माहौल खराब करे का प्रयास कर रहा है। प्रशासन की शिकायत चुनाव आयोग से भी की जाएगी। सपा कार्यकर्ता नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां के समर्थन में नारेबाजी करते हुए बाइकों से जुलूस की शक्ल में दफ्तर से तोपखाना और मोती मस्जिद की ओर रवाना हुए। इस बीच जिलाधिकारी को किसी ने खबर कर दी कि सपा कार्य बिना अनुमति के बाइक रैली निकाल रहे हैं। कुछ ही देर में प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ तोपखाना गेट पहुंचे और रैली को आने बढ़ने से रोक दिया।
पुलिस को देखकर कार्यकर्ता तितर-बितर हो गए। इसके बाद पुलिस और अधिकारी मोती मस्जिद के निकट पहुंचे। यहां भी सपा कार्यकर्ता बाइकों पर सवाल आजम खां और सपा के समर्थन में नारे लगा रहे थे। पुलिस ने यहां भी कार्यकर्ताओं को रैली की शक्ल में आगे जाने से रोक दिया। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से सपाई भड़क गए। सपा जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार और नगर अध्यक्ष आसिम राजा शिकायत करने डीएम के पास पहुंचे। उन्होंने डीएम से कहा कि शहर के लोग मतदाता जागरूकता अभियान चला रहे थे। लेकिन, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन शहर में भय और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहा है।