टीवी चैनल पर आने वाले रियलटी शो और टैलेंट हंट प्रोग्राम किसी भी कलाकार की सफलता की गारंटी नहीं होते। शो में प्रतिभाग करने के बाद ही कलाकार का असली संघर्ष शुरू होता है।
जीटीवी पर प्रसारित होने वाले सारेगामापा कार्यक्रम की टॉप टेन फाइनलिस्ट रहीं गायक कलाकार निधि कोहली ने रियलिटी शो और टैलेंट हंट प्रोग्राम के बाद के कलाकारों के संघर्षों और जीवन में आने वाले बदलावों के सवाल पर ये राय दी। निधि शुक्रवार रात शहर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आईं थीं।
दिल्ली की रहने वाली निधि कोहली के गायकी के क्षेत्र में कॅरियर की राह पीटीसी पंजाबी चैनल के टैलेंट हंट प्रोग्राम से हुई थी। आवाज पंजाब की नामक इस कार्यक्रम में निधि ने पहला स्थान हासिल किया था। इसके बाद वर्ष 2012 में निधि ने जीटीवी के सिंगिंग टैलेंट हंट प्रोग्राम सारेगामापा में प्रतिभाग किया और टॉप टेन फाइनलिस्ट में जगह बनाई।
निधि ने बताया कि टीवी चैनल के ऐसे प्रोग्राम कलाकार को मंच तो देते हैं, लेकिन इन कार्यक्रमों के दौरान किए जाने वाले एग्रीमेंट आगे की राह में मुश्किलें भी पैदा करते हैं। किसी भी रियलिटी शो या टैलेंट हंट में शिरकत करने के बाद कलाकार को अपनी जीवनशैली भी उसी तरह से आगे बढ़ानी होती है।
लेकिन यदि सितारे साथ न हों तो कॅरियर के अगले पड़ावों को पार करना आसान नहीं। बच्चों के रियलिटी शो और टैलेंट हंट प्रोग्राम के बारे में कहा कि इससे बच्चों का शैक्षिक विकास और कॅरियर बाधित होता है, इसलिए इन प्रोग्राम में 18 साल से कम आयु के बच्चों को शामिल न किया जाए।
अपने अगले मुकामों के बारे में पूछे जाने पर निधि ने बताया कि जनवरी में उनकी एलबम दुआवा मांगू रिलीज हो रही है। इसके साथ ही वो यशराज बैनर की एक फिल्म के गीतों में भी अपनी आवाज दे रही हैं।