रामपुर। बीते चुनावों से सबक लेते हुए इस बार लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रत्याशियों व अन्य नेताओं ने आचार संहिता का सतर्कता से पालन किया। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान आचार संहिता उल्लंघन का सिर्फ एक मुकदमा दर्ज हुआ। 2019 के लोकसभा चुनाव में 23 मुकदमे दर्ज किए गए थे। वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में भी आचार संहिता उल्लंघन के 12 मुकदमे दर्ज हुए थे।19 अप्रैल को पहले चरण में रामपुर लोकसभा सीट पर चुनाव संपन्न हो गया। रामपुर सीट से छह प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। आजम खां के जेल में होने के कारण इस बार प्रचार में वो रंग नजर नहीं आया जो बीते चुनावों में देखने को मिला था। अबकी बार चुनाव में मैदान में उतरे नए प्रत्याशियों व उनके प्रचार के लिए आए नेताओं ने आचार संहिता का कड़ाई से पालन किया।
आचार संहिता उल्लंघन का सिर्फ एक मुकदमा बसपा प्रत्याशी जीशान खां के खिलाफ दर्ज हुआ। उनके खिलाफ यह मुकदमा आंबेडकर शोभायात्रा के स्वागत के दौरान बिना अनुमति होर्डिंग लगाने को लेकर दर्ज हुआ था। इसके अलावा किसी भी प्रत्याशी या नेता ने चुनाव के दौरान न तो नफरती भाषण दिया और न कोई आपत्तिजनक टिप्पणी की। अन्य प्रकार से भी आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया।
वहीं 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन के 23 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिसमें अकेले सपा प्रत्याशी आजम खां के खिलाफ ही 13 मुकदमे दर्ज हुए थे। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ एक और भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। एक मुकदमा पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के खिलाफ भी दर्ज हुआ था, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें राहत दे दी थी।
आजम खां को आचार संहिता उल्लंघन के दो मामलों में हो चुकी सजा
2019 के लोकसभा चुनाव में आजम खां सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी थे। उन्होंने अपनी चुनावी जनसभाओं में शब्दों के तीर ऐसे चलाए कि वह अपनी सीमाएं भूल गए। उनके खिलाफ एक के बाद एक आचार संहिता उल्लंघन के 13 मामले दर्ज हुए थे। जिसमें ज्यादातर मामले नफरती भाषण के ही थे। यह सभी मामले कोर्ट पहुंचे तो कोर्ट ने उनको नफरती भाषण के दो मामलों में सजा भी सुना दी। सजा के बाद उन्हें चुनाव लड़ने के अयोग्य भी करार दिया गया था। सपा नेता पर हुई सख्ती का असर भी इस चुनाव में देखने को मिला।