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UP: इंदिरा गांधी ने रजवाड़ों से शुरू की मुखालफत, तब स्वतंत्र पार्टी से सांसद बने मिक्की मियां, पढ़िए यह किस्सा

Thu, 21 Mar 2024 01:21 PM IST
विजय पुंडीर वाहिद अली, रामपुर

सार

रामपुर जिले की सियासत की बात करें तो यहां की राजनीति नवाब परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। 50, 60, 70, 80 व 90 के दशक में रामपुर के नूर महल से ही कांग्रेस पार्टी के टिकट के बंटवारे होते थे। नवाब जुल्फिकार अली खां ने सन 1967 में कांग्रेस को अपने पहले ही लोकसभा चुनाव के दौरान दिखाई थी।
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रामपुर के नवाब जुल्फिकार अली खां और इंदिरा गांधी एक कार्यक्रम के दौरान - फोटो : FILE
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विस्तार
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कांग्रेस पार्टी में रामपुर लोकसभा सीट से नवाबी खानदान जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां और उनके परिवार का दबदबा रहा है। पार्टी में दबदबे को कायम करने के लिए नवाब परिवार ने मौका मिलने पर अपनी ताकत का बखूबी एहसास भी कराया है। 

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इंदिरा गांधी ने जब रजवाड़ों की मुखालफत शुरू की तो 1967 में कांग्रेस पार्टी छोड़कर अपने जीवन के पहले ही चुनाव में नवाब जुल्फिकार अली खां ने अलग पार्टी बनाई और जीत दर्ज कर संसद का रास्ता तय किया। जिसके बाद रामपुर की सियासत में नवाब परिवार का सितारा सालों-साल बुलंद रहा।   

रामपुर जिले की सियासत की बात करें तो यहां की राजनीति नवाब परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। 50, 60, 70, 80 व 90 के दशक में रामपुर के नूर महल से ही कांग्रेस पार्टी के टिकट के बंटवारे होते थे। राजनीतिज्ञ विशेषज्ञों ने बताया कि राजनीतिक पार्टी में नवाब परिवार का इतना दखल यूं ही नहीं हुआ, इसके पीछे नवाब जुल्फिकार अली खां की सियासी ताकत थी।
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जो उन्होंने सन् 1967 में कांग्रेस को अपने पहले ही लोकसभा चुनाव के दौरान दिखाई थी। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की रजवाड़ों के प्रति मुखालफत बढ़ी तो ताकत दिखाने के लिए नवाब जुल्फिकार अली खां ने अपनी अलग पार्टी का एलान कर दिया।

 

स्वतंत्र पार्टी बनाकर लोकसभा चुनाव मैदान में उतर गए। उस समय लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे। पार्टी का चुनाव चिह्न सितारा था, इस चुनाव में नवाब परिवार की ताकत ने कांग्रेस को हिलाकर रख दिया। नवाब जुल्फिकार अली खां ने नई पार्टी से शानदार जीत तो दर्ज की ही, साथ ही पूरे जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर भी जीत दर्ज कराई।

जिले मेंं सभी एमएलए भी स्वतंत्र पार्टी के ही जीतकर उप्र विधानसभा पहुंचे। रामपुर विधानसभा सीट से अख्तर अली खान, स्वार टांडा से मकबूल हुसैन, शाहबाद से बंसीधर, बिलासपुर से मुंशीलाल और ठाकुरद्वारा से ए खान जीतकर लखनऊ पहुंचे।

1967 का चुनाव इतिहास में तो दर्ज हुआ ही, लेकिन ये बड़ी चर्चा का विषय रहा। जिसके बाद नवाब जुल्फिकार अली खां कांग्रेस से चार बार सांसद बने, जबकि उनके निधन के बाद दो बार उनकी पत्नी बेगम नूरबानो दो बार सांसद बनीं। 

1967 में स्वतंत्र पार्टी 44 लोकसभा सीटें जीती थी

काशिफ खां ने बताया कि कांग्रेस ने खिलाफ बने राजघरानों के प्रतिनिधित्व वाले दल स्वतंत्र पार्टी को कुल मतों का 7.89 प्रतिशत प्राप्त हुआ और उसने तीसरी लोकसभा में 18 सीटें जीतीं। यह पार्टी चार राज्यों-बिहार, राजस्थान, गुजरात और उड़ीसा में प्रमुख कांग्रेस के मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी।

1967 के आम आम चुनाव में इसने 8.7 प्रतिशत वोट हासिल किए और चौथी लोकसभा में 44 सीटों के साथ सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बन गई। 72 सालों के लोकसभा चुनाव के इतिहास में 19 चुनाव  हुए, जिसमें नवाब परिवार से 9 संसद चुने गए।

 
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इससे पहले बहनाेई सैयद मेहंदी थे सांसद 

पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि सन् 1957 और 1962 में राजा पीरपुर सैय्यद मेहंदी अहमद दो बार सांसद बने। वो रामपुर के अंतिम शासक मिक्की मियां के बहनोई थे। उनकी शादी नाहीद लका बेगम से हुई थी। उनका रजवाड़ा फैजाबाद जिले में था। वो उस समय केंद्रीय सिंचाई एवं विद्युत मंत्री से संबद्ध संसदीय सचिव रहे। 

स्वतंत्र पार्टी से रामपुर लोकसभा और पांच विधानसभा में जीते प्रत्याशी
रामपुर लोकसभा सीट               नवाब जुल्फिकार अली खां 
रामपुर शहर विधानसभा          अख्तर अली खां
बिलासपुर विधानसभा                मुंंशीलाल जौहरी
शाहबाद विधानसभा                      बंसीधर 
स्वार-टांडा विधानसभा                मकबूल हुसैन 
ठाकुरद्वारा विधानसभा               ए खान
 
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