स्वतंत्र पार्टी बनाकर लोकसभा चुनाव मैदान में उतर गए। उस समय लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे। पार्टी का चुनाव चिह्न सितारा था, इस चुनाव में नवाब परिवार की ताकत ने कांग्रेस को हिलाकर रख दिया। नवाब जुल्फिकार अली खां ने नई पार्टी से शानदार जीत तो दर्ज की ही, साथ ही पूरे जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर भी जीत दर्ज कराई।
जिले मेंं सभी एमएलए भी स्वतंत्र पार्टी के ही जीतकर उप्र विधानसभा पहुंचे। रामपुर विधानसभा सीट से अख्तर अली खान, स्वार टांडा से मकबूल हुसैन, शाहबाद से बंसीधर, बिलासपुर से मुंशीलाल और ठाकुरद्वारा से ए खान जीतकर लखनऊ पहुंचे।
1967 का चुनाव इतिहास में तो दर्ज हुआ ही, लेकिन ये बड़ी चर्चा का विषय रहा। जिसके बाद नवाब जुल्फिकार अली खां कांग्रेस से चार बार सांसद बने, जबकि उनके निधन के बाद दो बार उनकी पत्नी बेगम नूरबानो दो बार सांसद बनीं।
1967 में स्वतंत्र पार्टी 44 लोकसभा सीटें जीती थी
काशिफ खां ने बताया कि कांग्रेस ने खिलाफ बने राजघरानों के प्रतिनिधित्व वाले दल स्वतंत्र पार्टी को कुल मतों का 7.89 प्रतिशत प्राप्त हुआ और उसने तीसरी लोकसभा में 18 सीटें जीतीं। यह पार्टी चार राज्यों-बिहार, राजस्थान, गुजरात और उड़ीसा में प्रमुख कांग्रेस के मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी।
1967 के आम आम चुनाव में इसने 8.7 प्रतिशत वोट हासिल किए और चौथी लोकसभा में 44 सीटों के साथ सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बन गई। 72 सालों के लोकसभा चुनाव के इतिहास में 19 चुनाव हुए, जिसमें नवाब परिवार से 9 संसद चुने गए।
इससे पहले बहनाेई सैयद मेहंदी थे सांसद
पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि सन् 1957 और 1962 में राजा पीरपुर सैय्यद मेहंदी अहमद दो बार सांसद बने। वो रामपुर के अंतिम शासक मिक्की मियां के बहनोई थे। उनकी शादी नाहीद लका बेगम से हुई थी। उनका रजवाड़ा फैजाबाद जिले में था। वो उस समय केंद्रीय सिंचाई एवं विद्युत मंत्री से संबद्ध संसदीय सचिव रहे।
स्वतंत्र पार्टी से रामपुर लोकसभा और पांच विधानसभा में जीते प्रत्याशी
रामपुर लोकसभा सीट नवाब जुल्फिकार अली खां
रामपुर शहर विधानसभा अख्तर अली खां
बिलासपुर विधानसभा मुंंशीलाल जौहरी
शाहबाद विधानसभा बंसीधर
स्वार-टांडा विधानसभा मकबूल हुसैन
ठाकुरद्वारा विधानसभा ए खान