रामपुर। नवाब खानदान की संपत्ति के बंटवारे प्रकरण में कोर्ट में प्रस्तुत की गई प्रस्तावित विभाजन योजना में एक लंबी बंदकू को सिर्फ म्यूजियम के लिए प्रस्तावित किया गया था। वहीं, रामपुर रियासतकाल के हथियारों में से करीब एक दर्जन प्रकार हथियार प्रयोग में न आने और रख-रखाव न हो पाने के कारण खराब हो गए हैं। इन हथियारों की अनुमानित कीमत को प्रस्तावित विभाजन योजना में निल दर्शाया गया था।
रामपुर में नवाब खानदान की करीब 2600 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है, जिसके बंटवारे को लेकर जिला जज की कोर्ट ने सोमवार 6 दिसंबर की तारीख में फैसला जारी किया है। कोर्ट द्वारा बंटवारे की प्रक्रिया के लिए पूर्व में पेश की गई प्रस्तावित विभाजन योजन के शेड्यूल बी की चल संपत्ति में शामिल रियासत कालीन हथियारों की संख्या, उनकी अनुमानित कीमत और स्थिति केबारे में भी जानकारी है। इस प्रस्तावित विभाजन योजना में एक लंबी बंदूक भी है जो कि सिर्फ म्यूजियम के लिए प्रस्तावित क ी गई थी। इसके साथ ही करीब एक दर्जन प्रकार के हथियारों की स्थिति खराब या टूटे होने के कारण उनकी अनुमानित कीमत निल दर्शाई गई है।
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निल कीमत वाले हथियारव उनकी संख्या :
-टूटी हुई मजेललोडिंग-सात, खराबरिवॉल्वर-10, एसबीएमएल20 बोर गन-एक, एसबीएमएल केवल बैरल-एक, एसबी रायफल 303 केवल बैरल-दो, एसबीबोल्ट एक्शन रायफल-एक, एसबीएमएल गन-एक, एसबीएमएल गन 16 बोरबिना मशीन-एक, डीबीएमएल गन 12 बोरआधी-एक, डीबीएमएल12 बोर- तीन, एमएल 16 बोर-एक, डीबीएमएल12 बोर हैमर-पांच, रायफल डीबी 500 हैमर-एक।
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शस्त्रागार की हुई थी वीडियोग्राफी
रामपुर। संपत्ति के मूल्यांकन के दौरान जब शस्त्रागार खोला गया तो वहां आलमारियों में हजारों की संख्या में हथियार पाए गए। इनकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। शस्त्रागार में स्कॉटलेंड, जर्मनी, ब्रिटेन, हालैंड, अमेरिका आदि की बनी पिस्टल, बंदूकें, रायफल व रिवाल्वर शामिल हैं। हजारों की संख्या में मिले इन हथियारों में खंजर, भाले, तलवारें व नेजे भी शामिल हैं।
नवाब संपत्ति का इन्होंने किया था सर्वे व मूल्यांकन
रामपुर। रामपुर रियासत के अंतिम शासक की संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया में चल-अचल संपत्ति के सर्वे व मूल्यांकन के कार्य में जिला शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश सक्सेना को संपूर्ण अचल संपत्ति के मूल्यांकन के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया गया था। जिन्होंने राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, कृषि और उद्यान विभाग की मदद से संपूर्ण संपत्ति का मूल्यांकन कर रिपोर्ट तैयार की थी। जबकि चल संपत्ति का मूल्यांकन एडवोकेट कमिश्नर सौरभ सक्सेना और मुजम्मिल हुसैन द्वारा किया गया था।
गैस वेल्डिंग से काटा गया था स्ट्रांग रूम
रामपुर। खासबाग पैलेस में स्थित स्ट्रांग रूम को खोलने में सर्वे व मूल्यांकन टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। स्ट्रांग रूम 1980 से बंद पड़ा था। स्ट्रांग रूम का निर्माण लंदन की प्रसिद्ध चब कंपनी द्वारा किया गया था। स्ट्रांग रूम की चाबियां गुम हो जाने के कारण इसकी दीवार को तोड़कर स्ट्रांग रूम के अंदर रखे सामान तक पहुंचने की कोशिश की गई थी। इसमें करीब दो सप्ताह तक का समय लग गया था। आखिरकार अंत में सर्वे व मूल्यांकन टीम को गैस वेल्डिंग कटर मशीन से इसकी दीवार को काटना पड़ा था। शुरूआती प्रयासों में कई घंटे बाद भी गैस कटर स्ट्रांग रूम की दीवार को कुल 16 मिलीमीटर ही काट सका था। इसे खोलने की लगातार कोशिश करने पर सातवीं बार में इसे खोला जा सका था। हालांकि स्ट्रांग रूम की कुछ तिजोरियों में थोड़े-बहुत सामान को छोड़कर यहां पर ज्यादा तिजोरियां खाली ही मिली थीं।