बकरीद पर लाखों लोगों ने ईदगाह और मस्जिदों में दो रकअत नमाज अदा की। उलमा ने नमाज, हज और कुर्बानी की अहमियत बयान की। मुल्क और कौम की, अमन और अमान कायम रहने और हज कुबूल फरमाने की दुआ को भी लाखों हाथ उठे। मक्का हादसे में मारे गए हाजियों की मगफिरत की भी दुआ की।
नमाज के बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो गया। फज्र की नमाज के साथ ही लोगों ने बकरीद की नमाज की तैयारी शुरू कर दी थी। मुसलमान साफ सुथरे कपड़े पहनकर दो रकअत नमाज अदा करने के लिए घरों से निकल पड़े। काफी तादाद में लोगों ने ईदगाह की तरफ रुख किया। वक्त से पहले ही ईदगाह नमाजियों से खचाखच भर गई थी।
ईदगाह में जगह कम पड़ी तो सड़कों पर ही सफबंदी की गई। शहर इमाम मुफ्ती महबूब अली ने बकरीद की नमाज अदा कराई। उन्होंने तकरीर में नमाज, हज और कुरबानी की अहमियत और फजीलत बयान की। नमाज के बाद शहर इमाम ने खुतबा पढ़ा। बाद में कौम-मुल्क की तरक्की, अमन-चैन की तरक्की, हज कुबूल फरमाने की दुआ को लाखों हाथ उठे।
मक्का हादसे में मारे गए हाजियों की मगफिरत के लिए भी दुआ कराई गई। जामा मस्जिद समेत शहर की और तमाम मस्जिदों में भी काफी तादाद में लोगों ने बकरीद की नमाज अदा की। उलमा ने कहा कि कुर्बानी अल्लाह की रजा के लिए की जाती है। मुसलमानों से आपस में मुत्तहिद होकर बेहतर जिंदगी गुजारने की सीख दी।
उलमा ने हिदायत दी कि सभी से अच्छा सुलूक करें। इस्लाम के उसूलों पर चलकर बेहतर जिंदगी गुजारें। उन्होंने कहा कि हज करने से इंसान पाक-साफ हो जाता है। हर साहिबे निसाब पर कुर्बानी वाजिब है। सैफनी क्षेत्र में शुक्रवार को बकरीद की नमाज अदा की गई। कस्बा स्थित ईदगाह में इमाम कारी अतीकुर्रहमान ने लोगों को नमाज अदा कराई।