हत्या के एक मामले में आरोपी ने खुद को मरा घोषित किया और आराम से अपने ही घर में रहता रहा। सोलह साल तक उसने पुलिस और अदालत को चकमा दिया। आखिरकार अपने ही रिश्तेदार से दुश्मनी उसको महंगी। जेल से जमानत पर बाहर आए रिश्तेदार ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर पोल खोल दी। कोर्ट ने वारंट जारी किया। पुलिस ने मुखबिर लगाए और गुरुवार को यह हत्यारोपी अपने ही घर से पुलिस के चंगुल में फंस गया। पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया जहां से उसको जेल भेज दिया गया।
मामला शहर के गंज थाना क्षेत्र का है। गंज थाने के बजरिया खानसामा निवासी भूरा कुरैशी की वर्ष 1989 में हुई थी। इस हत्या में सरदार, रईस आदा, रईस और सद्दीक नामजद हुए थे। पुलिस ने सभी को पकड़कर कर जेल भेजा था। सन 1980 में रामपुर कोर्ट से फैसला हुआ, जिसमें सरदार और रईस आदा को सजा हुई। बाद में वह जमानत पर छूट गए। मामला उच्च न्यायालय में चला गया। सन 2000 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से भी निचली अदालत से मिली सजा का फैसला बरकरार रखा गया। गंज थानाध्यक्ष जीत सिंह के अनुसार सन 2000 में हाईकोर्ट से सजा बरकरार रहने के बाद से सरदार और रईस आदा फरार चल रहे थे।
इसी बीच दोनों ने खुद को मरा घोषित करा दिया। सरदार का अपने ही एक रिश्तेदार से कुछ समय पूर्व झगड़ा हो गया था। वह रिश्तेदार किसी मामले में जेल चला गया। उसे लगा कि सरदार ने चाल चलकर उसको जेल भिजवाया है। वह जेल से जमानत पर बाहर आया तो सरदार को सबक सिखाने के लिए करीब एक माह पूर्व उसने कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया। इस हलफनामा में उसने सरदार को जिंदा बताया। इस पर कोर्ट ने सरदार के खिलाफ वारंट जारी किया।
गंज थाना प्रभारी जीत सिंह के अनुसार गुरुवार को सूचना मिली कि सरदार अपने घर पर ही मौजूद है। पुलिस ने छापा मारा तो वह घर पर ही मिला। उसे न्यायालय में पेश किया गया जहां से अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया है।