स्कूलों में दोपहर का भोजन देने के नाम पर बच्चों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में घटिया किस्म की दाल, चावल और तेल का प्रयोग किया जा रहा है। इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा विभाग की की जांच रिपोर्ट में हुआ है। विभाग अब इस मामले की रिपोर्ट शासन के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग को भेजने की तैयारी कर रहा है।परिषदीय स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों को दोपहर का खाना दिया जाता है।
भोजन बनाने के लिए स्कूलों में बकायदा रसोइये की तैनाती है। मिड-डे मील वितरण से लेकर उसके बनाने की जिम्मेदारी स्कूल के हेडमास्टर के साथ ही प्रबंध समितियों और प्रधानों की होती है। मिड-डे मील के तहत राशन की व्यवस्था पूर्ति विभाग करता है। हर स्कूल के लिए अलग से राशन आवंटित किया जाता है। मिड-डे मील व्यवस्था में खेल करके बच्चों को बहुत ही घटिया किस्म का खाना परोसा जा रहा है।
इससे बच्चों की सेहत बनने के बजाय और बिगड़ जाएगी। शासन ने खाद्य एवं सुरक्षा विभाग को मिड-डे मील के तहत आने वाली खाद्यान्न सामग्री के सैंपल लेकर जांच कराने के आदेश दिए थे। कुछ माह पहले जिले के विभिन्न स्कूलों से दाल, चावल और सरसों के तेल के नमूने भरे गए थे, जिनकी जांच रिपोर्ट मिल गई है। मिड-डे मील की जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली है। जांच रिपोर्ट में दाल, चावल और तेल के सभी नमूने फेल हो गए हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी डा. चमन लाल के मुताबिक चावल के दो नमूने फेल हो गए हैं। चावल का नमूना असुरक्षित आया है। इसके मायने ये हंै कि इस चावल के सेवन से बच्चों की सेहत न सिर्फ बिगड़ सकती है, बल्कि उनकी जान तक जा सकती है।दाल और तेल के नमूने भी फेल हुए हैं। इसकी रिपोर्ट अब शासन और प्रशासन के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग को भेजी जा रही है।