गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में मुक्तसर के शहीदों की याद में माघी समागम के मौके पर विभिन्न जत्थों ने सबद- कीर्तन कर संगत को निहाल कर दिया। सेवादारों को सिरोपे भेंटकर सम्मानित किया गया। गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।
तराई का प्रसिद्व गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में शनिवार को 45वां माघी समागम दशमेश सेवक दल के तत्वावधान में मनाया गया। अखंड पाठ का भोग सुबह डाला गया। मुख्य ग्रंथी ने गुरुवाणी का पाठ किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी दीवान हाल बिच पहुंची, जहां श्री गुरुग्रंथ साहिब की परंपरागत ढंग से स्थापना की गई। दीवान हाल में ज्ञानी गुरशरण सिंह के कविशरी जत्थे, ज्ञानी संत सिंह पारस के ढाडी जत्थे, ज्ञानी बख्शीश सिंह ने सबद- कीर्तन पेश करके संगत को निहाल कर दिया।
हजूरी कथावाचक ज्ञानी सतवंत सिंह ने माघी के पर्व व 40 सिंहाें के शहीदी पर प्रकाश डाला। दशमेश सेवक दल के प्रधान तीरथ सिंह व महासचिव सूरत सिंह, गुरुद्वारे के प्रधान अर्जुन सिंह गिल आदि ने पालिकाध्यक्ष प्रमोद कुमार जौहरी व श्री गुरुनानक इंटर कालेज के प्रबंधक हरजिंद्र सिंह व कर्मठ सेवादारों को सिरोपा देकर सम्मनित किया। समागम में स्त्री सत्संग सभा, श्री गुरु सिंह सभा, सिख क्लब, पंथक सेवक दल, सिख प्रतिनिधि सभा ने सहयोग किया। व्यवस्था में बलवीर चौहान, तारा सिंह चंदी, कुलदीप सिंह पुरी, भगत सिंह, जगजीत सिंह, गुरप्रताप सिंह, जनरैल सिंह, परमजीत कौर भोला, खुशपाल कौर, महेंद्रजीत कौर आदि रहीं।