गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में गुरुवार को मुक्तसर के शहीदों की याद में माघी समागम का आयोजन हुआ। विभिन्न जत्थों ने सबद कीर्तन कर संगत को निहाल कर दिया। सेवादारों को सिरोपे भेंटकर सम्मानित किया गया। तराई के प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में गुरुवार को 44वां माघी समागम दशमेश सेवक दल की ओर से मनाया गया।
तीन दिन पहले रखे गए अखंड पाठ का भोग गुरुवार सुबह डाला गया। मुख्य ग्रंथी ज्ञानी हरदीप सिंह ने गुरबानी का पाठ किया। आसा दी वार में सबद कीर्तन हुआ। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी दीवान हाल में पहुंची। परंपरागत ढंग से इसकी स्थापना की गई।
ज्ञानी खजान सिंह के हजूरी रागी जत्थे, लुधियाना के ढांढी जत्थे ने कीर्तन कर संगत को निहाल किया। कवि दरबार में लखनऊ से आए प्रो. मनमोहन सिंह मोनी, त्रिलोचन सिंह चन, हरमिन्द्र सिंह दीवाना ने साथियों के साथ कविताएं प्रस्तुत करके संगत को भाव-विभोर कर दिया। हजूरी कथावाचक ज्ञानी सतवंत सिंह ने शहीदों पर प्रकाश डाला।
दशमेश सेवक दल के प्रधान विचित्र सिंह और महासचिव सूरत सिंह, गुरुद्वारे के पूर्व प्रधान भगत सिंह ने सेवादारों को सिरोपे देकर सम्मानित किया। गुरु का अटूट लंगर बरता गया। संचालन महासचिव तीरथ सिंह ने किया। समागम में स्त्री सत्संग सभा, श्री गुरु सिंह सभा, सिख क्लब, पंथक सेवक दल, सिख प्रतिनिधि सभा ने सहयोग किया।
व्यवस्था में बलवीर सिंह चौहान, तारा सिंह चंदी, कुलदीप सिंह पुरी, भगत सिंह, जगजीत सिंह, गुर प्रताप सिंह, जरनैल सिंह, परमजीत कौर भोला, खुशपाल कौर, महेंद्रजीत कौर, डिम्पी सिंह, अमरीक सिंह चौहान, गुरनाम सिंह, बलवीर सिंह मल्ही, सादा सिंह, बलवीर सिंह, गुरमीत सिंह, हरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, कुलविंद्र सिंह, निर्मल सिंह, शिवेंद्र सिंह रहे।