रामपुर। जनपद के मसवासी, दढ़ियाल और स्वार क्षेत्र में तेंदुए का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीण दहशत में हैं। इंसानों के साथ गोवंशीय पशु और पालतू कुत्ते भी तेंदुए का शिकार बन रहे हैं।
वन विभाग ने पिंजरे लगाए, कैमरा ट्रैप और ड्रोन से निगरानी कराई तथा कई बार कांबिंग अभियान भी चलाया, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो सका।
24 जून को सीतारामपुर के पास इरशाद हुसैन और रईस अहमद पर तेंदुए ने हमला कर दिया, हालांकि दोनों बाल-बाल बच गए। जुलाई की शुरुआत में जमना-जमनी निवासी साबी सिंह खेत जाते समय हमले का शिकार हुए।
18 जुलाई को सुल्तानपुर पट्टी निवासी मोहम्मद शहीद के पैर में तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया। अगले दिन सीतारामपुर निवासी अरुण सैनी भी हमले में घायल हुए। इसके बाद एक अन्य बाइक सवार युवक पर भी हमला किया गया।
अप्रैल में रहमतगंज में तेंदुए ने पालतू कुत्ते को मार डाला। 27 मई को मानपुर उत्तरी की पशुशाला में घुसकर दो गोवंशीय पशुओं को निवाला बना लिया। जून और जुलाई में रहमतगंज, मानपुर उत्तरी, चौहद्दा, बेलवाड़ा और आसपास के गांवों में भी कई पशुओं पर हमले हुए। लगातार बढ़ती घटनाओं के चलते ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने और प्रभावित गांवों में गश्त बढ़ाने की मांग की है।
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तीन तेंदुओं की हो चुकी है मौत
रामपुर। जनपद में पिछले कुछ वर्षों में तीन तेंदुओं की मौत भी हो चुकी है। वर्ष 2025 में धर्मपुर उत्तरी के पास सड़क हादसे में एक तेंदुए की मौत हो गई। फरवरी 2026 में हुसैनगंज के जंगल में शिकारियों के तार के फंदे में फंसे तेंदुआ शावक की उपचार के दौरान मौत हो गई। 19 अप्रैल 2026 को दढ़ियाल में कोसी पुल के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से एक मादा तेंदुए की जान चली गई। इन घटनाओं से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। संवाद
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हमलों से बदली ग्रामीणों की दिनचर्या
रामपुर। तेंदुओं के लगातार हमलों के बाद ग्रामीण शाम ढलते ही खेतों में जाने से बच रहे हैं। कई गांवों में लोग समूह बनाकर खेतों की ओर जा रहे हैं। बच्चों को अकेले बाहर नहीं भेजा जा रहा है। पशुपालक भी रात में पशुओं को खुले में छोड़ने से बच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए को पकड़े बिना दहशत खत्म नहीं होगी। संवाद
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वर्जन
प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कराई जा रही है। कैमरा ट्रैप, पिंजरे लगाना और कांबिंग अभियान जारी हैं। ग्रामीणों से रात में अकेले बाहर न निकलने, खेतों में समूह में जाने और तेंदुए की सूचना मिलते ही वन विभाग को तत्काल जानकारी देने की अपील की गई है। -प्रणव जैन, डीएफओ