भोट गांव में काठगोदाम हाईवे भारी तबाही लाएगा। करीब ढाई सौ मकान इसकी जद में आ गए हैं। करीब साढ़े चार सौ परिवार बेघर होने के करीब पहुंच गए हैं। प्रशासन इन्हें मुआवजा जरूर देगा, लेकिन जिन लोगों के मकान हैं उनके नाम जमीन नहीं है। क्योंकि पहले कभी जिन लोगों ने जमीनें बेचीं थीं, उन लोगों ने बैनामा कराने के बजाए, स्टांप लिख दिए थे। तहसील के कागजों के मुताबिक जमीन जिसके नाम है, उसे मुआवजा मिलेगा। इसी को लेकर भोट में खलबली मची हुई है।
रामपुर से काठगोदाम तक सिक्सलेन का हाईवे बनाया जाना है। इसके लिए काठगोदाम तक जमीन अधिग्रहीत की जा रही है। बिलासपुर रोड पर भोट गांव में सबसे अधिक ढाई मकान टूटने की स्थित है। इससे करीब साढ़े चार सौ परिवारों में खलबली मची हुई है। मकान टूटने के बाद भी मुआवजा हाथ न आ पाने के संकट से ग्रामीण परेशान हैं। क्योंकि ग्रामीणों ने करीब बीस से तीस साल पहले जिन लोगों से जमीन खरीदी थी, उन लोगों से बैनामे नहीं कराए थे।
सिर्फ एक स्टांप पर सरसरी तौर पर लिखवा लिया था। अब गांव वालों ने जो खसरा खतौनियां तहसील से निकलवाई हैं उसमें मौजूदा समय में मकान बनाकर रह रहे किसी भी ग्रामीण का नाम जमीन के मालिक के तौर पर नहीं है। खसरा खतौनी में जमीन तो आबादी में दर्ज है, लेकिन नाम किसी और का है। ऐसी स्थिति में नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया मकान तोड़ती है तो मुआवजा राशि जमीन मालिक के नाम जाएगी। मकान बनाकर रह रहे ग्रामीण ठगे से देखते रह जाएंगे। ग्रामीणों में इसी को लेकर आक्रोश पनप रहा है, यही आक्रोश सड़कों पर आंदोलन का रूप ले सकता है।