जिलेभर में शुक्रवार को सुहागिनों ने करवाचौथ का उपवास रखकर पति की दीर्घायु की कामना की। सुहागिनों ने सुबह से निर्जला व्रत रखकर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की दीर्घायु का वर मांगा। इसके बाद चलनी से चंद्रमा और पति के दर्शन कर पति के हाथ से जल पीकर सुहागिनों ने व्रत खोला और भोजन ग्रहण किया।
पति के लिए दीर्घायु का वर मांगने और अपने लिए अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए सुहागिनों ने शुक्रवार को करवाचौथ का व्रत रखा। भोर की पहली किरण के साथ ही प्रात: कालीन पूजन कर सुहागिनों ने पति के चरण स्पर्श कर उपवास की शुरुआत की। शाम को शृंगार कर सुहागिनों ने करवे में जल भरकर भगवान श्री गणेश का पूजन किया।
करवाचौथ की कथा सुनी और सुनाई। भगवान श्रीगणेश को भोग लगाया। इसके बाद रात में आकाश में चंद्रोदय होते ही सुहागिनों ने अमृत रश्मि निर्गत करने वाले चंद्रदेव को करवे से अर्घ्य देकर पति के लिए अमृत और अपने लिए अखंड सौभाग्य की कामना की। चंद्रमा दर्शन के बाद पति का दर्शन कर उनका पूजन किया।
पति के हाथों से जल पीकर उपवास पूर्ण करते हुए खोला। पंडित संतोष शर्मा बताते हैं कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवाचौथ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां पहले भगवान गणेश का पूजन करती हैं। मान्यता है कि छल-कपट को त्यागकर श्रद्धा भाव से करवाचौथ का व्रत रखने से सब क्लेश और कष्ट दूर होते हैं।