पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ विरोधियों की मोर्चाबंदी जारी है। अब उनके निशाने पर जौहर विश्वविद्यालय में प्रस्तावित करीब 12 करोड़ रुपये के निर्माणाधीन भव्य पंडाल है। उसपर अब ग्रहण लग सकता है। मामला राजभवन तक तो पहुंचा ही है साथ ही इस मामले में अब आरटीआई का भी सहारा लेने की तैयारी की जा रही है। आरटीआई के तहत यह सूचना मांगी जा रही है कि अभी तक इस शिकायत का आखिर हुआ क्या।
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खां को सरकार जाने के बाद विरोधियों ने चारों ओर से घेरना शुरू कर दिया है। विरोधी उनकी जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर तो घेर हीरहे हैं साथ ही कई अन्य मुद्दों पर भी घेरे हैं। अब पूर्व मंत्री को जौहर यूनिवर्सिटी में बनने वाले विशाल पंडाल के मुद्दे पर घेरने की तैयारी हो रही है। सपा शासन में संस्कृति विभाग जौहर
विश्वविद्यालय में 12 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से भव्य पंडाल बनवा रहा था। आदेश के मुताबिक इसके तैयार होने के बाद वह इसे जौहर विवि को सौंप देने की बात हुई थी। सरकार ने पिछले साल इस पंडाल का स्वामित्व राज्य सरकार के संस्कृति विभाग से छीनकर जौहर विश्वविद्यालय को सौंप दिया था यही नहीं, राज्य सरकार के प्रयोग के लिए मुफ्त आवंटन की शर्त भी हटा दी गयी थी। इस पंडाल भवन का स्वामित्व मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित है।
सरकार जाने से पहले ही कांग्रेसी नेता फैसल लाला ने इस मुद्दे पर राज्यपाल से शिकायत की थी, जिसके बाद राज्यपाल स्तर पर शासन को कार्रवाई के लिए भेजा था, लेकिन सरकार ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। अब इस मामले में कांग्रेसी नेता ने आरटीआई का सहारा लेने की कवायद की है। इसके तहत यह सूचना मांगी जा रही है कि अभी तक इस मामले में राजभवन की ओर से क्या कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही इस मुद्दे पर कार्रवाई न होने की वजह क्या है। फिलहाल यदि इस प्रोजेक्ट की भी जांच हुई तो यहां बनने वाला पंडाल खतरे में पड़ सकता है।