रामपुर। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने शुक्रवार को जिला कारागार का निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों एवं कैदियों की रिहाई को लेकर चर्चा की गई। इस बीच गंभीर अपराधों में सजायाफ्ता कैदियों को लेकर मामला फंस गया। डीएम ने जेल अधीक्षक को निर्देश जारी करते हुए कहा कि इस संबंध में शासन से पत्राचार करने के बाद दिशा निर्देश प्राप्त कर लें।
कोरोना काल में शासन ने जेल में बंद कैदियों और बंदियों को पैरोल पर रिहा करने का फैसला किया है। शासन के निर्देशों के मुताबिक, गंभीर अपराधों में लिप्त अपराधियों को छोड़कर सिर्फ ऐसे अपराधियों को ही पैरोल दी जाए, जिन्हें कम सजा का प्रावधान हो। जेल अधीक्षक ने जो सूची तैयार की थी, उसमें गंभीर अपराधों में लिप्त अपराधी भी शामिल थे।
ऐसे में डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़ व पुलिस अधीक्षक शगुन गौतम ने मंत्रणा करते हुए कहा कि गंभीर अपराधों में लिप्त सजायाफ्ता को पैरोल पर रिहा करने को लेकर स्पष्ट आदेश नहीं हैं। उन्होंने जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया को निर्देश देते हुए कहा कि वे शासन से पत्राचार कर दिशा निर्देश प्राप्त कर लें। उसी के बाद विचार किया जाएगा। जेल अधीक्षक ने बताया कि आजीवन कारावास से जुड़े 23 कैदियों को रिहा किया जाना था, जिस पर अब शासन के आदेशों के बाद ही विचार किया जाएगा।