उद्यमियों को आजम खां की नाराजगी भारी पड़ गई। मंगलवार को उद्योग बंधु की बैठक में रोशनबाग और अजीतपुर के 29 उद्यमियों के प्लाटों का आवंटन निरस्त करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। इस घोषणा के साथ ही उद्यमियों का पारा चढ़ गया। उद्यमियों ने उद्योग केंद्र के उपायुक्त का घेराव कर लिया और हंगामा शुरू कर दिया। प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उद्यमियों ने कहा कि प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई की है, इसके खिलाफ वो कोर्ट जाएंगे।
उद्योग बंधु की मीटिंग के बाद जब बाद में उपायुक्त अनुज कुमार को कपिल आर्या ने ज्ञापन सौंपा। कहा कि आवंटन रद्द करना नियम विरुद्ध है। वो पहले से ही कोर्ट की शरण में जा चुके हैं। कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है। अब वो लोग बुधवार से हड़ताल करेंगे। रोशनबाग और अजीतपुर औद्योगिक आस्थान में उद्यमियों को उद्योग लगाने के लिए प्लाट आवंटित किए गए थे। आरोप है कि इन प्लाटों पर उद्यमियों ने कोठियां बना लीं। ये मामला पिछले दिनों से गर्माया हुआ था।
नगर विकास मंत्री आजम खां की नाराजगी के बाद उद्योग विभाग ने उद्यमियों को नोटिस जारी किए थे। प्लाट आवंटन निरस्त करने के लिए मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में उद्योग बंधु की बैठक बुलाई गई। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में शुरू हुई मीटिंग में आवंटित प्लाटों की समीक्षा शुरू की गई। डेढ़ घंटे की मीटिंग के बाद डीएम ने रोशनबाग के 16 और अजीतपुर के 13 उद्यमियों के प्लाट का आवंटन निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए।
इससे उद्यमियों का पारा चढ़ गया। डीएम तो बाहर निकल गए, उद्यमियों ने जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त अनुज कुमार को घेर लिया। हंगामा शुरू कर दिया। उद्यमी प्रशासन पर उद्योगों को चौपट करने का आरोप लगाने लगा। काफी देर तक हंगामे के बाद उद्यमी सभागार से बाहर निकल आए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उद्यमियों ने कहा कि वो प्रशासन के कदम का हर संभव विरोध करेंगे। कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
हो सकती है ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
प्लाट आवंटन निरस्त किए जाने की प्रक्रिया के बाद अब प्रशासन इन कोठियों के ध्वस्तीकरण की भी योजना बना रहा है। हालांकि अभी इसको लेकर कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन अधिकारिक सूत्रों की मानें तो अब इन कोठियों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
उद्यमी बोले, हमे तो बना भवन दिया था
उद्योग बंधु समिति की बैठक में कई उद्यमियों ने तर्क रखा कि उन्हें जो प्लाट आवंटित किया गया था वो पूरी तरह से बना हुआ था। उन्होंने अपनी ओर से उसमें कोई निर्माण नहीं कराया। डीएम राकेश कुमार सिंह ने भरोसा दिया कि ऐसे उद्यमियों के रिकार्ड की जांच होगी। इसके लिए इन उद्यमियों का रिकार्ड भी जांचा जाएगा।
गायब रहे आईआईए अध्यक्ष
उद्योग बंधु समिति की बैठक में मंगलवार न तो आईआईए के चेयरमैन आकाश कुमार सक्सेना ही दिखे और न ही चैंबर आफ कामर्स के अरविंद नंदा। दोनों ही मीटिंग से नदारद रहे। आईआईए के चेयरमैन खुद को एक विवाह समारोह में होने की बात कह रहे थे तो नंदा के बाहर होने की बात कही गई।
बनाना था एक कमरा बना डाली पूरी कोठी
नियमानुसार आवंटित भूखंड पर उद्योग लगाने के साथ ही आवास के लिए एक कमरा और रसोई घर बनाने की इजाजत थी। उद्यमियों ने इंडस्ट्री तो लगाई नहीं, उल्टे उस पर आलीशान कोठी बना डाली। इसका खुलासा उद्योग बंधु समिति की बैठक के दौरान हुआ। नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाने की वजह से ही भूखंडों का आवंटन निरस्त कर दिया गया।उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए उद्योग विभाग की ओर से उद्यमियों को प्लाटों का आवंटन किया जाता है।
नियमानुसार उद्यमियों को इन आवंटित प्लाटों पर फैक्ट्री लगाने के साथ ही, इसमें आवास के रूप में एक कमरा और रसोईघर बनाने की अनुमति होती है। उद्यमियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए उद्योग तो लगाए ही नहीं, उल्टे भूखंड पर कोठियां खड़ी कर लीं। इसका खुलासा मीटिंग के दौरान हुआ। बकौल डीएम राकेश कुमार सिंह, आवंटित प्लाट पर उद्यमियों को 18 माह के भीतर उद्योग शुरू कर देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उद्यमियों ने कई-कई साल तक उसमें उद्योग नहीं लगाए और उस जमीन पर कोठियां खड़ी कर लीं। ये नियमों के खिलाफ है। उन्होंने मीटिंग के दौरान उद्यमियों से सीधे सवाल किए, लेकिन उद्यमी जवाब नहीं दे पाए। अफसरों पर ही सवालिया निशान लगाने लगे।