जिले में खनन माफिया बेखौफ हैं। शनिवार को पुलिस प्रशासन ने खनन के 34 धंधेबाजों पर एफआईआर और दरोगा को सस्पेंड कर सख्ती के संकेत दिए थे लेकिन माफिया को इससे कोई असर नहीं पड़ा। सीधे तौर पर जिला प्रशासन को चुनौती देते हुए शहर के प्रमुख चौराहों पर अवैध खनन का रेता बेच रहे हैं। रविवार को सुबह सात बजे से दोपहर तक खनन का रेता बिकता रहा, लेकिन किसी अफसर ने कार्रवाई नहीं की।
जिले में अवैध खनन कराने वाले माफिया को राजनीतिक संरक्षण हासिल है। गाजियाबाद और मेरठ के माफिया स्थानीय लोगों को संसाधन उपलब्ध कराके खनन कराते हैं। संसाधनों में जैसे जेसीबी, पोकलेन मशीन और डंपर तक देते हैं। स्थानीय लोगों को मजदूरी देते हैं। पहले कोसी नदी में स्वार और टांडा तहसील में अवैध खनन किया जा रहा था। प्रशासन ने सख्ती की तो अब यह शहर के किनारे घाटमपुर इलाके से खनन कराने लगे हैं।
ट्रैक्टर-ट्राली और डंपरों के बजाए डनलप और बैलगाड़ी से लाकर इसे शहर में बेचा जा रहा है। स्टार चौराहा, शाहबाद गेट, गाधी समाधि, और गंगापुर आवास विकास में होकर रोज डनलप निकल रहे हैं। पुलिस और प्रशासनके सामने से खनन के धंधेबाज निकल रहे हैं, लेकिन पकड़े नहीं जा रहे हैं।