बिलासपुर में सैजनी और भाखड़ा नदी की तरह बरेली सीमा पर बैगुल नदी में अवैध खनन हो रहा है। खनन से उपजाऊ जमीन को ऊबड़-खाबड़ बनाया जा रहा है। कई सौ एकड़ जमीन की उर्वरक क्षमता खतरे में पड़ गई है। आलम तो यह है कि रेत से लदी ट्रैक्टर ट्रालियां खजुरिया थाने के सामने से गुजारी जा रही हैं। लेकिन पुलिस आंखें मूंदे रहती है।
उत्तराखंड से निकली बैगुल नदी बंगाली कालोनी, सितौरा, लखीमपुर, गोदी से होकर बरेली की सीमा में प्रवेश कर रही है। बैगुल नदी के किनारे बिलासपुर के किसानों की जमीनें हैं। लेकिन खनन के धंधेबाज बैगुल नदी का भी सीना चीर कर अवैध खनन कर रहे हैं। करीब महीने भर से सितौैरा और उसके आस-पास इलाके में बैगुल नदी में अवैध खनन हो रहा है। नदी से रोजाना 50-70 ट्राली रेत निकाली जा रही है।
अधिकतर ट्रालियां खजुरिया थाने के सामने से गुजार कर रेत बिलासपुर, बंगाली कालोनी और रुद्रपुर की सीमा पर पहुंचाई जा रही है। अवैध खनन से उपजाऊ जमीन ऊबड़-खाबड़ हो रही है। नदी का रुख बिलासपुर की ओर मुड़ गया है। आशंका है कि अगर अवैध खनन नहीं रोका गया तो सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में समा जाएगी। उधर, स्वार और टांडा तहसील में खनन जारी है, वहीं रामपुर शहर के पास घाटमपुर में अवैध खनन को भी पुलिस नहीं रोक पा रही।