रामपुर की नुमाइश ग्राउंड में हुनर हाट में जयपुरी लाख की चूड़ियां तैयार करते इस्लाम अहमद। संवाद
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रामपुर। भले ही चूड़ी बनाने में काम आने वाली लाख (लाह) बिहार, बंगाल और छत्तीसगढ़ से आती हो, लेकिन इस लाख का मोल जयपुर में तय होता है, जिससे यहां के कारीगर रंग-बिरंगी चूड़ियां बनाते हैं। हुनर हाट में आए ये कलाकार पांच मिनट के भीत ही चूड़ी तैयार कर देते हैं। वह भी बेहद मजबूत और आकर्षक। इस लाख की खासियत यह होती है कि ये पूर्णतया: केमिकल रहित होती हैं। ऐसे में रामपुर की महिलाओं को ये चूड़ियां बेहद लुभा रही हैं।
जयपुर की लाख की चूड़ियों ने कला और शिल्प की दुनिया में अलग पहचान बना ली है। रामपुर के हुनर हाट में कुछ ऐसे ही अनोखे दस्तकारों ने रामपुर में दस्तक दी है। जयपुर के नेहरू बाजार से आए हस्तशिल्प कलाकार इस्लाम अहमद की मानें तो वह लाख की चूड़ियां बनाने का काम दस साल की उम्र से कर रहे हैं। वह अपने पिता अहमद हुसैन के साथ चूड़ियां बनाते थे। पहले इस कला को उतनी पहचान नहीं मिली थी, लेकिन अब यह कला लोगों को खूब लुभा रही है। वह बताते हैं कि सात पीढ़ियों से लाख की चूड़ियां बनाने का काम कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार के लोकल फॉर वोकल अभियान से उनके कारोबार को गति मिली है। उनके अनुसार लाख की चूड़ियां बनाने में जिस कच्चे माल का प्रयोग किया जाता है वह पूर्णतया केमिकल रहित होता है। यह लाख बिहार, छत्तीसगढ़ और बंगाल से आती है, लेकिन चूड़ियां सिर्फ जयपुर में तैयार होती हैं। वह बताते हैं कि लाख की चूड़ी बनाने में पांच मिनट का वक्त लगता है और इस चूड़ी की मजबूती अन्य चूड़ियों के मुकाबले अधिक होती है और खूबसूरत भी अधिक होती हैं। चूंकि, चूड़ियों के विभिन्न प्रकार के डिजाइन होते हैं। लिहाजा, समय इस बात पर भी निर्भर करता है किस प्रकार का डिजाइन बनाया जा रहा है। कुछ रंगीन चूड़ियां साधारण होती हैं, जबकि कुछ अलंकृत होती हैं। चूड़ियों की सज्जा में छोटे नगों का प्रयोग किया जाता है, जिससे चूड़ियां आर अधिक आकर्षक हो जाती हैं।
क्या होती है लाख
रामपुर। लाख केरिया लक्का नाम के कीट की लार से तैयार होती है। ये राल कुसुम, वैशाख आदि पेड़ों की शाखों पर बनती है, जिस बाद में खुरचकर निकाला जाता है। इसके बाद भी लाख कई प्रक्रियाओं से होकर गुजारा जाता है। इस प्रक्रिया से पैदा होने वाले उत्पाद को शलक लाख या चपड़ा कहते हैं।
कैसे बनती हैं चूड़ियां
रामपुर। लाख की चूड़ियां बनाने के लिए कोयले को जला दिया जाता है। इसके बाद मिश्रण को बनाने के लिए पहले दस्तकार चपड़ी एक बड़ी कढ़ाई में गर्म करते हैं। मिश्रण में आर्द्धता के लिए थोड़ा सा पानी भी मिलाया जाता है, जिसके बाद लाख को पिघलाने के लिए उसे गर्म किया जाता है। फिर इसमें गिया पाउडर मिलाया जाता है। यह प्रक्रिया लाख का मोटा गोला बनने तक जारी रहती है। इसके बाद मिश्रण को चूल्हे से निकालकर अच्छी तरह से गूंथा जाता है, जिसके बाद रोल को लकड़ी पर लपेटा जाता है। फिर आग के सहारे इस रोल को पिघलाकर मनचाहा आकार दिया जाता है और चूड़ियां तैयार की जाती हैं।