सीआरपीएफ आतंकी हमले के मामले में मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव जवाहर लाल बुधवार को भी गवाही देने नहीं पहुंचे। उनकी गवाही न होने से इस मामले की सुनवाई टल गई। अब इस मामले की सुनवाई 31 मई को होगी। उधर कोर्ट में सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर में आतंकी हमले के आरोपियों की पेशी को देखते हुए सुबह से ही सुरक्षा का तगड़ा बंदोबस्त रहा। गेट पर ही पुलिस तलाशी के बाद लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा था। मेटल डिटेक्टर द्वार के जरिये लोगों को कोर्ट परिसर में इंट्री दी गई।
31 दिसंबर 2007 की रात में सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हुए आतंकी हमले में सात जवान शहीद हो गए थे, जबकि एक रिक्शा चालक की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस व एटीएस की टीम ने हमले के चालीस दिन बाद पाकिस्तानी आतंकियों समेत आठ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बुधवार को इस मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने बरेली व लखनऊ जेल में बंद सभी आरोपियों जंगबहादुर, शरीफ, गुलाब खां, कौसर खां समेत आठ को कोर्ट में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता दलविंदर सिंह ने प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव जवाहर लाल को इस मामले में गवाह के तौर पर पेश होना था, लेकिन वह शासकीय कार्यों में व्यस्त हैं। इसकी वजह से वह नहीं आ सके हैं। लिहाजा इस मामले की सुनवाई टाल दी जाए।
अभियोजन के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए एडीजे प्रथम जयपाल सिंह ने नाराजगी जाहिर करते हुए सुनवाई के लिए 31 मई की तारीख निश्चित की है। सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रहे। वहीं दूसरी ओर आरोपी गुलाब खां ने कोेर्ट में मामले के शीघ्र निस्तारण की मांग रखी है, जिसके लिए जेल के माध्यम से उसने कोर्ट को प्रार्थना पत्र भेजा है। कोर्ट इस मामले पर भी 31 मई को सुनवाई करेगा।