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कारतूस कांड मामले में कोर्ट पहुंचे गवाह, कोविड प्रोटोकॉल के चलते नहीं हुई गवाही

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रामपुर। सूबे के चर्चित कारतूस कांड में सोमवार को कोर्ट में तारीख थी। जिसमें गवाह कोर्ट पहुंचे लेकिन, कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद जारी की गई कोविड गाइडलाइन के अनुपालन के चलते गवाही की प्रक्रिया नहीं हुई। अब इस मामले में कोर्ट ने 29 जनवरी की तारीख तय की है।
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सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में 26 अप्रैल 2010 को लखनऊ एसटीएफ की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ राम-रहीम पुल के नीचे से पीएसी के सेवानिवृत्त दरोगा यशोदानंदन को गिरफ्तार करते हुए कारतूस कांड का खुलासा किया था। एसटीएफ ने इस दौरान सीआरपीएफ के हवलदार विनोद और विनेश को भी गिरफ्तार किया था।
एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी और कारतूस बरामद किए थे। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही और पूछताछ के आधार पर मुरादाबाद पीटीसी में तैनात आर्मोरर नाथीराम सैनी को भी गिरफ्तार किया था। यशोदानंदन की निशानदेही पर इलाहाबाद, कानपुर, झांसी, मऊ आदि जनपदों से भी अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में ट्रायल के दौरान मुख्य आरोपी यशोदानंदन की मौत हो चुकी है। इस मामले में पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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यह मामला एडीजे द्वितीय विजय कुमार की कोर्ट में चल रहा है, जिसमें सोमवार को तारीख थी। जिसमें एसटीएफ के हेड कांस्टेबल मिथलेश कुमार झा गवाही के लिए पहुंचे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार नंदा ने बताया कि कोविड गाइडलाइन के अनुसार अब अति महत्वपूर्ण एवं आवश्यक मामलों में ही एविडेंस यानि गवाही की प्रक्रिया होगी। जिसके चलते गवाह मिथलेश कुमार झा की गवाही नहीं हुई। इस मामले में अगली तारीख 29 जनवरी तय की गई है।
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