जिला पुरुष अस्पताल में व्हीलचेयर से मरीज को लेकर जाती तीमारदार। संवाद
रामपुर। सरकार भले ही स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने में लगी हो, लेकिन जिला अस्पताल में मरीजों की कोई सुनने वाला नहीं है। हालत यह है कि तीमारदारों को ही एंबुलेंस से मरीज को उतारकर स्वयं स्ट्रेचर खींचकर इमरजेंसी व वार्ड तक पहुंचाना पड़ता है। सीएमओं ने मामले की जांच के बाद दोषी पाए जाने पर वार्ड बॉय समेत अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई की बात कही है।
जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए हर महीने करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, फिर भी मरीजों और तीमारदारों को समस्याओं से जूझना पड़ता है। सोमवार को जिला अस्पताल की पड़ताल की गई तो सामने आया कि अधिकतर वार्ड बॉय आराम कर रहे हैं। तीमारदार मरीजों को स्ट्रेचर पर बैठाकर ले जा रहे हैं।
जिला अस्पताल में दर्जनों वार्ड बॉय तैनात हैं और उनके वेतन पर हर महीने लाखों रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी मरीजोें और तीमारदारों को परेशान होना पड़ रहा है। अस्पताल में मरीजों के तीमारदार नालापार निवासी सद्दीक,जेल रोड निवासी शुऐब, कुरैनी कला निवासी कृष्णपाल और शहर निवासी शहजादी अपने मरीजों को खुद ही स्ट्रेचर और व्हीलचेयर को खुद ही खींचते हुए एक्सरे और चिकित्काें के पास परामर्श के लिए लेकर गए। जिला पुरुष अस्पताल में तो हालत इस कदर खराब हैं कि मरीजों के साथ आईं महिलाएं भी खुद ही स्ट्रेचर और व्हीलचेयर को खींचकर ले जाने पर मजबूर हैे।