मिलक। मृतक संजीव पांडे के भाई बाबूराम पांडे ने बताया कि लगातार आठ साल केस की पैरवी करने में काफी पैसा खर्च हो गया था और इस दौरान उन्हें कर्ज भी लेना पड़ा था बताया कि हम न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। दोषियों को सजा मिली है। आज हमारा सारा संघर्ष सफलता में बदला है। यदि दोषी उच्च न्यायालय की शरण में जाएंगे तो हम भी उच्च न्यायालय में पहुंचकर अपनी तरफ से कैस की पैरवी करेंगे।
प्रधान के पति को मौत के घाट उतार देने के मामले में 23 लोगों को शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद घोसीपुरा गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां के लोग कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है तो वहीं दूसरी ओर गंगापुर शर्की में कोर्ट के फैसले से संतुष्ट तो हैं,लेकिन उनकी एक मांग है कि आरोपियों को उम्रकैद नहीं बल्कि फांसी की सजा होनी चाहिए।
जमीनी विवाद में एक ही गांव घोसीपूरा के 23 लोगों को उम्र कैद की सजा कोर्ट ने सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद शुक्रवार को इस गांव में सन्नाटा पसरा नजर हुआ आया। गलियां सूनसान नजर आईं। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि सभी लोगों के परिवार एवं काफी संख्या में ग्रामीण उनसे मिलाई करने के लिए जेल पहुंचे हुए हैं। इस दौरान ग्रामीण एवं परिजन मीडिया से भी बचते रहे। वहीं दूसरी और ग्राम गंगापुर शर्की में कोर्ट के फैसले के बाद कुछ राहत जरूर नजर आई।
मौत के घाट उतारे गए संजीव पांडे की पत्नी सोनी ने बताया कि हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा था। हमें न्याय मिला है। मृतक के बड़े भाई बाबूराम ने बताया कि उन्होंने आठ साल लगातार कोर्ट में केस की पैरवी की और दोषियों को सजा दिलाने के लिए अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी।
उनका कहना था कि आठ सालों में दौड़ भाग करने के दौरान उनके ऊपर कर्जा भी हो गया था। परंतु उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने मृतक भाई के परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनका पालन पोषण किया और उन्हें पढ़ा लिखा रहे हैं।
घटना को याद कर सिहर उठते हैं परिवार के लोग
मिलक। संजीव के भाई बाबू राम ने बताया कि आठ साल पहले जमीन के विवाद में उनके भाई संजीव की हत्या कर दी गई थी। उस समय मृतक की पत्नी सोनी गांव की प्रधान थीं। उनके पति संजीव पांडे व परिवार के अन्य सदस्यों का पड़ोस के गांव के ही कुछ लोगों से जमीन को लेकर विवाद हो गया था, जिसके चलते बीते 22 जुलाई 2017 को संजीव अपने भाई राजीव और अन्य दो-तीन साथियों के साथ अपनी जमीन देखने के लिए खेत पर गए थे। इसी बीच वहां पर घात लगाए बैठे कुछ लोगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया लाठी डंडों से हमला किया उसके बाद गोली चला दी जिससे संजीव की मौत हो गई। उनके सगे भाई राजीव और ममेरे भाई अखिलेश को चार-चार गोलियां लगी थीं। गांव निवासी ताराचंद को भी एक गोली लगी थी। मृतक के भाई बाबूराम ने कोतवाली में तहरीर देकर 25 नामजद एवं कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखवाया था।
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सैकड़ों बीघा ग्राम समाज की भूमि पर आज भी कब्जा
मृतक के भाई एवं केस के वादी बाबूराम ने बताया कि यह इलाका रामगंगा से जुड़ा खादर का इलाका है। घोसीपुरा एवं गंगापुर शर्की के बीच मात्र डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी है गंगा के किनारे खाली पड़ी भूमि पर आज भी अनेकों लोगों का कब्जा है। आठ साल पहले उनके भाई मृतक संजीव की पत्नी गांव की प्रधान हुआ करती थी। ग्राम समाज की खाली पड़ी भूमि को कब्जा मुक्त करने और असहाय लोगों को भूमि के पट्टों की प्रक्रिया के विचार के चलते कब्जाधारियों ने संजीव की हत्या कर दी थी। बताया कि आज भी काफी जमीन लोगों के कब्जे में है।
दोषियों को फांसी दिलाए जाने की मांग की
पति की हत्या के बाद 23 आरोपियों को उम्र कैद की सजा मिलने के बाद शनिवार को मृतक संजीव पांडे की पत्नी सोनी उनके 17 वर्षीय पुत्र कमल, 13 वर्षीय पुत्र विवेक, 10 वर्षीय पुत्र अंजलि ने कहा कि दोषियों को फांसी की सजा दिलाई जाए और हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि दोषियों को और कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।
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पति की मौत के बाद पत्नी व बच्चों का संघर्ष में बीता जीवन
मृतक की पत्नी सोनी ने बताया कि जब उनके पति की मौत हुई थी तब उनका बड़ा बेटा कमल 9 वर्ष का था जो आज 17 वर्ष का है और इंटर की पढ़ाई कर रहा है। वही छोटा बेटा विवेक उस समय 6 वर्ष का था जो आज 13 वर्ष का है हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहा है। सबसे छोटी बेटी अंजलि उस समय 2 वर्ष की थी जो आज 10 वर्ष की है और कक्षा 8 की पढ़ाई कर रही है। बताया कि छोटे-छोटे बच्चों के ऊपर से पिता का साया चले जाने से उनका जीवन संघर्षपूर्ण बीता है। उन्होंने सभी बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और पिता की कमी को खुद ही बखूबी निभाया है।
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समझौते के लिए बड़ी रकम का दिया गया था प्रलोभन
मृतक संजीव पांडे के भाई बाबूराम ने बताया कि उनके भाई की मौत के बाद केस के चलते दोषियों की ओर से एक मोटी रकम लेकर समझौता करने का प्रस्ताव उनके पास आया था परंतु उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि वह अंतिम सांस तक न्यायालय में लड़ेंगे और दोषियों को सजा अवश्य दिलवाएंगे।
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