अमले ने घपलेबाज प्रधानों के आगे घुटने टेक दिए हैं। किसी भी प्रधान से मनरेगा के पैसे की रिकवरी नहीं हो सकी है। प्रधानी के चुनाव के दो चरण निपट गए और अब तीसरे की बारी है। रिकवरी से बचने के लिए कई प्रधानों ने अपने रिश्तेदारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है।
मनरेगा में धांधली रोकने के लिए शासन ने मनरेगा और इंदिरा आवास योजना का सोशल आडिट कराने का फैसला लिया है। 2014-15 में जिले के 232 गांवों में सोशल आडिट कराया गया। आडिट में 18 गांवों में 15 लाख से ज्यादा का गबन पकड़ा गया। अधिकतर गांवों में कमियां पाई गईं।
रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और धन की रिकवरी के आदेश दिए। जिला पंचायत सदस्य पद की नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले भी प्रधानों को नोटिस जारी किया गया था। डीपीआरओ ने प्रधानों को चेतावनी दी थी कि मनरेगा का पैसा जमा नहीं किया तो वो चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
इसके बाद भी घपलेबाज प्रधानों से रिकवरी नहीं हो सकी। कई प्रधानों ने खुद न लड़कर अपने रिश्तेदारों को चुनाव मैदान में उतार दिया। कुछ बकायेदार प्रधानों को नो-ड्यूज जारी कर दिया गया। लाखों रुपये की रिकवरी अब मुश्किल से होगी। क्योंकि प्रधानी के चुनाव के दो चरण निपट गए।
तीसरे चरण की अब बारी है। जिला विकास अधिकारी भानुप्रताप सिंह के मुताबिक धन की रिकवरी के लिए सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। शीघ्र ही धन की रिकवरी कराई जाएगी।