पटवाई। क्षेत्र के भैया नगला गांव की चार किशोरियां शरद पूर्णिमा के उपवास के बाद रामगंगा में स्नान करने गईं थी। ज्यादा गहराई में पहुंच जाने से वह बह गईं। तीन को बचा लिया गया, जबकि एक की डूबने से मौत हो गई।
शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर गांव की महिलाएं व लड़कियां उपवास रखती है। रविवार को करीब चार बजे उपवास रखने वाली करीब 30 महिलाएं रामगंगा घाट पर नहाने के लिए गईं थी। उन्हीं के साथ गांव निवासी बब्लू की पुत्री मुस्कान, पप्पू की पुत्री मोनिका, बंटू की पुत्री मनी भी थीं। चारों एक साथ नहा रही थीं कि गहरे पानी में आ जाने से बह गईं।
वही गंगा किनारे खड़े गांव के दीपक, प्रशांत, मनीस, मनजीत ने चारों को डूबता देख छलांग लगा दी। वह तीन किशोरियों को बचाने में सफल हो गए। एक किशोरी मुस्कान 17 पानी के तेज बहाव में बहकर दूर निकल गईं। 30 मिनट बाद करीब एक किलोमीटर आगे मुस्कान का शव मिला। यह देख परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। थाना प्रभारी पुष्कर सिंह ने बताया कि थाने तक सूचना नहीं आई है। मामले की जानकारी की जाएगी।
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गंगा किनारे खड़े लड़के बने मसीहा
पटवाई। मौके पर गांव के दीपक, प्रशांत, मनीस, मनजीत न होते तो चारों किशोरियों की डूबकर मौत हो सकती थीं। जब चारों महिलाएं डूबने लगीं तो लोगों के चिलाने के बाद ये दौडें। उन्होंने नदी में कूदकर तीन किशोरियों को तो बचा लिया। लेकिन मुस्कान को वह बचा नहीं पाए। संवाद