टांडा थाना क्षेत्र का मामला साल 2007 का है। विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए आजम खां द्वारा टांडा में जनसभा करने के बाद बसपा नेता धीरज कुमार शील ने टांडा थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि आजम खां ने जनसभा को संबोधित करते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करके अपमान किया था। इससे विभिन्न वर्गों के लोगों में शत्रुता को बढ़ावा दिया और लोगों के बीच दुश्मनी या नफरत पैदा करने, धर्म, जाति और भाषा के आधार पर बांटने का प्रयास किया। तहरीर के बाद पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
वहीं यतीमखाना और डूंगरपुर प्रकरण में आजम खां के इशारे पर लूटपाट करने, मारपीट करने और बस्ती पर बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त करने के आरोप में शहर कोतवाली और गंज थाने में 12-12 मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें से यतीमखाने के दो और डूंगरपुर के एक मामले में गुरुवार को कोर्ट में सुनवाई हुई।
चारों मामले एमपी-एमएलए कोर्ट (सेशन ट्रायल) में चल रहे हैं। सुनवाई के दौरान दौरान टांडा थाने में दर्ज मामले में फोटोग्राफर सुभाष ने गवाही दी। उनकी गवाही पूरी हो गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी। साथ ही डूंगरपुर प्रकरण के एक मामले में वादी अबरार ने गवाही दी। जिस पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता द्वारा उनसे जिरह की गई। उनकी जिरह पूरी नहीं हो सकी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी। वहीं, यतीमखाना प्रकरण के दो मामलों में से एक मामले में वादी आसिफ ने कोर्ट में गवाही दी। जबकि आजम खां पर धमकाने का आरोप लगाने वाले नन्हें कोर्ट जरूर पहुंचे, लेकिन उनकी गवाही नहीं हो सकी है।