रामपुर। लेखपाल से मारपीट व सरकारी कार्य में बाधा डालने और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल करने के मामले में जेल में बंद सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उज्ज्वल दीदार सिंह साबी को कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद राहत दे दी है। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है।
27 दिसंबर को सपा नेता के विरुद्ध लेखपाल अश्विनी कुमार ने बिलासपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुए उन पर मारपीट व सरकारी कार्य में बाधा, लूटपाट और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने का आरोप लगाया था। इस मामले में उनके नौकर पलविंदर सिंह को भी नामजद किया गया था।
सपा नेता घटना के बाद से फरार चल रहे थे। एसपी ने उनकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था। पुलिस ने एक मार्च को दिल्ली से उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। साबी इस वक्त जेल में बंद हैं।
उनकी ओर से उनके अधिवक्ता ने जमानत के लिए याचिका दायर कर रखी है, जिस पर पिछले तीन दिन से लगातार सुनवाई चल रही है। बृहस्पतिवार को भी इस मामले में सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में अभियोजन की ओर से दलील दी गई कि सपा नेता ने लेखपाल के साथ मारपीट व मोबाइल छीना है। साथ ही जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया है। इसलिए जमानत निरस्त की जाए।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सपा नेता को राजनीतिक रंजिश के आधार पर झूठा फंसाया गया है। उनके खिलाफ दर्ज अधिकतर मुकदमों का निस्तारण हो चुका है। पत्रावली पर पुख्ता सुबूत नहीं हैं।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अपर जिला जज एससी-एसटी पीएन पांडे ने उज्ज्वल दीदार सिंह उर्फ साबी की जमानत याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने आदेश दिया कि 50-50 हजार रुपये के दो जमानती व मुचलका दाखिल करने पर उनको रिहा करने का आदेश दे दिया।