आचार संहिता उल्लंघन के एक मामले में पूर्व विधायक यूसुफ अली को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। भोट थाना में 04 जनवरी 2012 को चुनाव आचार संहिता के प्रभारी रहे जिला उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक वसीम मियां ने यूसुफ अली के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि चमरौवा विधानसभा क्षेत्र के पदमपुरी और मजरा तालकपुर में यूसुफ अली ने सार्वजनिक स्थानों और बिजली के खंभों पर फोटोयुक्त पोस्टर चस्पा किए। जिसको आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना गया।
पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इस मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट मजिस्ट्रेट ट्रायल निशांत मान की कोर्ट में हुई। अभियोजन की ओर से वादी मुकदमा सहित कई गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और आरोपी को सजा देने की मांग की गई। जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता मेहबूब अली पाशा ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को राजनीति रंजिश के चलते फंसाया गया है और पत्रावली पर गवाहों के बयान में विरोधाभास है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद पूर्व विधायक यूसुफ अली को आचार संहिता उल्लंघन के एक मामले से बरी कर दिया। उनके खिलाफ अभी आचार संहिता उल्लंघन के 16 मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं।