जहन्नुम से आजादी का दूसरा अशरा शुरू हो गया। दूसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का है। जश्न-ए- खत्म कुरान में उलमा ने रमजान के दूसरे अशरे की फजीलत बयान की। उलमा-ए- दीन ने फरमाया कि जानबूझकर तरावीह की नमाज छोड़ना सख्त गुनाह है।
रमजान का पहला अशरा पूरा और दूसरा अशरा शुरू हो गया। दूसरा अशरा जहन्नुम से निजात दिलाने वाला है। शहर के कई मस्जिदों में कुरान मुकम्मल होने पर उलमा ने कुरान, रमजान और दूसरे अशरे की फजीलत बयान की। उलमा-ए-दीन ने फरमाया कि रमजान में पढ़ी जाने वाली तरावीह की 20 रकअत नमाज इस्लाम के दूसरे खलीफा हजरत उमर फारूख के जमाने से है। इसमें पूरा कुरान सुना जाता है। यह इबादत नफिल इबादत की सुन्नत मुआक्किदा है।
इसलिए जानबूझकर तरावीह की नमाज छोड़ना सख्त गुनाह है। उलमा-ए- दीन ने फरमाया कि पैगंबरे इस्लाम ने तरावीह की बुनियाद डाली थी। दूसरी ओर नानकार की कदीरी मस्जिद में नमाज-ए- तरावीह में कुरान मुकम्मल हो गया। हाफिज अकील कदीरी ने कुरान सुनाया। जश्न खत्म कुरान में मौलाना राशिद कदीरी, मौलाना अली अहमद कदीरी, हकीम सगीर नूरी, शादाब कदीरी ने रमजान और जिकात की फजीलत पर रोशनी डाली। इस मौके पर सूफी मोईन कदीरी, अफजाल कदीरी, आफताब कदीरी भी थे।