बिलासपुर (रामपुर)। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) से इस साल रामपुर में पहली मौत हुई है। 18 दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद तीन साल के बच्चे ने मंगलवार सुबह हल्द्वानी के एक अस्पताल में दम तोड़ा। जेई की दस्तक के बाद जिले में स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। जिले में जेई ने पहली बार 2019 में दस्तक दी थी। इस साल एक किशोर की मौत भी हुई थी। अब तक जिले में चार लोगों की जेई से मौत हो चुकी है।
बिलासपुर क्षेत्र के खजुरिया कला गांव निवासी तीन वर्षीय अबूजर खान ने मंगलवार सुबह हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। 29 अगस्त को जांच में अबूजर में जेई की पुष्टि हुई थी। इसके बाद उधम सिंह नगर के सीएमओ ने रामपुर की सीएमओ डॉ. दीपा सिंह को मामले की जानकारी दी थी। इस पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से परिवार और गांव में निगरानी की जा रही थी। मौत की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग में भी खलबली मच गई और टीम ने गांव पहुंचकर परिवार के सदस्यों के दोबारा नमूने लिए। सीएचसी अधीक्षक डॉ. मणिक अग्रवाल ने बताया कि टीम ने गांव पहुंचकर परिवार के लोगों के नमूने लिए हैं।
परिजनों का अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
वहीं, परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। गांव निवासी ट्रक चालक नाहिद खान के अनुसार 12 अगस्त को वह पत्नी रूबीदा बेगम और दोनों बच्चों के साथ बरेली के मीरगंज थाना क्षेत्र के ठिरिया गांव स्थित ससुराल गए थे। वहां से लौटने के बाद 18 अगस्त की रात बड़े बेटे अबूजर को तेज बुखार आया। अगले दिन उसे बिलासपुर के निजी अस्पताल ले गए, जहां से चिकित्सकों ने रेफर कर दिया। इसके बाद रुद्रपुर के कई निजी अस्पतालों में उपचार कराने का प्रयास किया, लेकिन बच्चे को भर्ती नहीं किया गया। परिजन उसे हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल ले गए। अस्पताल में जांच के दौरान 29 अगस्त को अबूजर में जेई की पुष्टि हुई। तब से उसका अस्पताल में ही इलाज चल रहा था। मंगलवार सुबह करीब सात बजे परिजनों ने बच्चे के वेंटिलेटर के तार निकले देखे तो उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इसके बाद चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों ने लापरवाही से इन्कार करते हुए कहा कि बच्चे की मौत के बाद तार निकाले गए थे। परिजन शव लेकर गांव पहुंचे और सुपुर्द ए खाक कर दिया।
अबूजर का हल्द्वानी में उपचार चल रहा था। मंगलवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हुई है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। टीमों ने घर-घर जाकर सर्वे किया और ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। परिजनों समेत आसपास के लोगों के सैंपल लिए गए हैं।
डॉ. सत्यप्रकाश, जिला सर्विलांस अधिकारी