रामपुर। अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल अभियान के तहत नगर में महिलाओं की विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाओं ने अपने अधिकारों और समानता को लेकर विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। इसके बाद सारिका रस्तोगी ने कहा कि महिला को शक्ति रूप में पूजा जाता है। महिला की संयम शीलता, सहजता, धैर्य, साहस और सृजन की शक्ति के कारण ही उसे शक्ति स्वरूपा कहा जाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए सजग रहना चाहिए। जब महिला स्वयं ही अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होगी। तो उन्हें वह हासिल कैसे करेगी।
मंजू शर्मा ने कहा कि महिला जन्म से ही त्याग और सेवाभाव को आत्मसात कर लेती है। बचपन में किसी की बेटी के रूप में एक परिवार में खुशियों की सौगत लाती है, तो विवाह के बाद अपने जीवनसाथी के मान और स्वाभिमान का आधार बनती है। एक ही जीवन में दो परिवारों के मान-सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर सिर्फ महिला ही करती है।
सीमा रस्तोगी ने कहा कि आज महिला सशक्तिकरण की बात की जाती है लेकिन, महिला कभी कमजोर थी ही नहीं। महिला सिर्फ अपने परिजन के सम्मान और अपनी संयम शीलता के चलते अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों को भी सह लेती है लेकिन, अब समय बदल रहा है। महिलाएं घर की दहलीज से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा और योग्यता के बल पर नई इबारत लिख रही हैं। समाज और देश-विदेश में अपने परिवार का मान बढ़ा रहीं हैं।
इस अवसर पर अमिता रस्तोगी, आदर्श कुमारी, शशि रस्तोगी, मिथलेश, मंगला, निर्मला, नीलम, लक्ष्मी, एकता आदि मौजूद रहीं।