सोमवार से ठेके पर चल रहे शहर के 52 ट्यूबवेल ठप हो जाएंगे। साथ ही बीस वार्डों की सफाई व्यवस्था भी चौपट हो जाएगी। अधिशासी अधिकारी के गैर हाजिर होने से नगर पालिका में नए टेंडर नहीं हो सके। ऐसे में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
रामपुर शहर की बात की जाए तो स्टाफ के अभाव में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े तमाम कामकाज सेवा प्रदाता के माध्यम से कराए जाते हैं। इसमें शहर के 20 वार्डों की साफ सफाई का काम भी ठेकेदारों के जरिए कराया जाता है। इसके अलावा शहर की पेयजलापूर्ति के लिए 52 नलकूपों का संचालन भी ठेकेदारों के जरिए होता है।
इसके लिए हर साल नगर पालिका बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास किए जाते हैं, इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाती है। किन्तु, रामपुर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार यादव पिछले काफी दिनों से बिना छुट्टी के गायब हैं। उन्होंने नगर पालिकाध्यक्ष से लेकर जिलाधिकारी तक को अपने जाने की कोई जानकारी नहीं दी।
अवकाश स्वीकृत कराने का पत्र दिया, लेकिन बिना मंजूरी के ही मुख्यालय छोड़कर चले गए। इसके चलते पालिका के तमाम जरूरी कामकाम नहीं हो सके। वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद अब इसका असर शहर के लाखों लोगों पर भी पड़ेगा। दरअसल, बोर्ड की बैठक न होने और टेंडर प्रक्रिया न होने से पुराने ठेकेदारों ने काम बंद करने का एलान कर दिया है। इस बाबत उन्होंने नगर पालिका को लिखित में जानकारी भी दे दी है कि नए वित्त वर्ष में टेंडर न होने तक वह काम नहीं करेंगे।
इससे सोमवार से शहर के 52 नलकूपों का संचालन बंद हो जाएगा। वहीं, शहर के बीस वार्डों की साफ सफाई का काम भी बंद होना तय है। ऐसे में लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी। गर्मी में पेयजल का संकट और गलियों में गंदगी पसरने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, इस बाबत नगर पालिकाध्यक्षा फात्मा अजहर ने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को जानकारी दे दी है। डिप्टी सीएम ने भी ईओ को निलंबित करने की कार्रवाई के लिए कह दिया है, लेकिन यदि कोई विकल्प नहीं तलाशा गया, तो दूसरे ईओ के आने तक शहर में हालात काफी बिगड़ सकते हैं।